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राहत सामग्री में भी हेराफेरी कर रही सरकार

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कश्मीर में आई बाढ़ के बाद सरकार द्वारा छह माह के लिए प्रति परिवार प्रति माह पचास किलो राशन देने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन सरकार के इस फैसले की धज्जियां निकलते नजर आ रही है।
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सीएपीडी के डिपो द्वारा केवल पैंतीस किलो राशन ही लोगों को दिया जा रहा है। इससे प्रभावितों में रोष है। उनका कहना है कि सरकार अपने ही फैसले से मुकर रही है। श्रीनगर के छानपुरा इलाके के रहने वाले फारूक अहमद के अनुसार सरकार द्वारा किया गया वादा मजाक साबित हुआ है।

श्रीनगर के अलावा अन्य जगहों से भी इस तरह की बातें सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पचास किलो की जगह पैंतीस किलो राशन ही प्रति परिवार दिया जा रहा है।
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सरकार के आदेश पर की जा रही कटौती

फारूक के अनुसार उनके इलाके के सीएपीडी डिपो के सेल्समैन का कहना है कि सरकार से मिले आदेश के अनुसार वितरण किया जा रहा है। वहीं एक सामाजिक कार्यकर्ता नासिर के अनुसार राशन की मात्रा में कटौती से जाहिर है कि राज्य एवं केंद्र सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं है, जिससे पर्याप्त राशन मुहैया करवा सके।

उनके अनुसार बार-बार कश्मीर में बरपे कहर को राष्ट्रीय आपदा घोषित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वह बाहर से सहायता ले सकें। स्थानीय आरिफ के अनुसार अगर सरकार ने राशन वितरण में कटौती का अगर कोई फैसला लिया भी है, तो उसे लोगों तक पहुंचानी चाहिए, ताकि लोगों को सही स्थिति की जानकारी हो सके।

वहीं सीएपीडी के एक अधिकारी के अनुसार सरकार द्वारा उन्हें आदेश दिए गए हैं कि छह माह के लिए प्रति परिवार दो सौ दस किलो राशन दिया जाना चाहिए, जो पैंतीस किलो प्रति परिवार हर माह बनता है। इन्हीं आदेश के तहत डिपो से राशन मुहैया करवाया जा रहा।
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राजनीतिक दल और ग्रामीण भी उठा रहे उंगली

दूसरी ओर लोजपा के यूथ प्रेसिडेंट संजय सर्राफ ने श्रीनगर में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राज्य सरकार द्वारा राहत सामग्री बांटे जाने की प्रक्रिया पर उंगली उठाते हुए कहा कि अगर केंद्र की तरफ से पर्याप्त राहत सामग्री आ रही है, तो वह कहां जा रही।

उन्होंने कहा कि पीड़ितों तक राहत सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की तरफ से इक्कीस सौ करोड़ की राहत राशि भेजी गई है, जो जिला आयुक्तों और तहसीलदारों के जरिये बांटी जानी है। इसमें राज्य सरकार के विधायक वोट बैंक बनाने के प्रयास में इस प्रक्रिया में दखलंदाजी करते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने सरकार से अपील की कि जिस तरह छह माह के लिए मुफ्त राशन बांटने का ऐलान किया गया है, उसी तरह प्रभावितों के लिए स्कूल फीस, बिजली फीस और पानी फीस छह माह के लिए माफ कर दिया जाना चाहिए।

बारामूला जिले के पट्टन इलाके के त्रिगुंड गांव के लोगों में राज्य सरकार द्वारा दी गई राहत राशि को लेकर रोष है। इसी को लेकर लोगों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि जितना नुकसान हुआ, उसकी तुलना में दी जा रही राहत राशि काफी कम है। इससे लोगों की दिक्कतें दूर नहीं हो सकेंगी। उन्होंने राज्य सरकार की तरफ से पर्याप्त राहत राशि मुहैया करवाने की मांग पर आवाज बुलंद की।
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