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गोरखानगर, गुज्जरनगर, राजीव काॅलोनी से निखिल मेहता
कामन इंट्रो:
भारी बारिश और बाढ़ के बाद शहर के गोरखा नगर, गुज्जर नगर और राजीव कॉलोनी में तबाही के मंजर के बीच लोग दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। बीच-बीच में महिलाएं-बुजुर्ग और बच्चों की आंखों से बेबसी आंसू बनकर छलक पड़ती है। मलबे से फिसलन हो गई है। सड़क पर खड़ा हो मुश्किल हो रहा है। बच्चे-बुजुर्ग घरों में कैद होकर रह गए हैं। गोरखानगर-गुज्जरनगर में लोग खुद ही मलबा हटाने में जुटे हैं। बिजली-पानी है नहीं। सर्वाधिक खराब हालत राजीव नगर की है। जहां लोग कमरों में चार-चार फुट मलबा इकट्ठा है। लोग बेघर का सा जीवन जीने को मजबूर हैं। नहाना-धोना-खाना-पीना सब बुरी तरह से प्रभावित है। (संवाद)
जान का जोखिम लेकर हटाए बिजली के तार, संबंधित विभाग ने नहीं लिया संज्ञान
जम्मू। भारी बारिश से हुए नुकसान की भरपाई करना तो दूर की बात, चार दिन के बाद भी घरों व सड़कों से मलबा साफ नहीं हो पाया है। प्रभावित परिवारों को सदस्य नौकरी-व्यापार को बंद कर घर पर साफ-सफाई में जुटे हैं। ना तो बिजली है और ना ही पानी। बस बेबसी और लाचारी की स्थिति है।
बात करें गोरखा नगर के पुंछी मोहल्ले की तो वहां के निवासी केवल कृष्ण का कहना है कि आंखों के सामने बर्बादी का मंजर याद आ जाता है तो रूह कांप जाती है। तिनका-तिनका जोड़ कर आशियाना बनाया था। लगभग सात लाख का नुकसान हो गया है। घर तो डूबा ही, साथ ही पूरी भरी हुई दुकान भी डूब गई। उस दिन से लेकर रोज सामान इधर-उधर कर रहे हैं। एक बेड को साफ करके उस पर रात में सोने को बनता है।
कोई सरकारी विभाग नाम पूछने तक नहीं आया। वहीं गोरखा नगर निवासी चमन लाल का सब्र घर के टूटे शीशों को देखते ही टूटा। नम आंखों से बारिश से हुई बर्बादी को बयां करते हुए घर के बचे हुए कुछ बर्तनों को दिखाते हुए उनकी आवाज भारी हो गई। उनका कहना था कि सब कुछ खत्म हो गया। फ्रिज, कूलर यहां तक की छत के पंखे कुछ नहीं बचा। रोजाना सुबह से लेकर शाम सफाई में ही बीत जाती है। सरकार ने गली में आया मलबा तक साफ करवाने का कोई प्रबंध नहींं किया।
बलदेव राज का कहना है कि मोहल्ले में पानी नहीं आ रहा। सफाई करने में काफी दिक्कत आ रही है। पूरा मोहल्ला झाडू,बेलचा लेकर सुबह से शाम तक सफाई करने में जुट जाता है मगर मलबा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। राजू ने बताया कि चार दिन हो गए हैं। किसी ने हमारे मोहल्ले की सुध तक नहीं ली। गली में इतना मलबा है कि चलना मुहाल हो चुका है। इतनी फिसलन है कि बच्चे-बुजुर्ग तो चार दिन से घर में कैद होकर रह गए हैं। बिजली का खंभा गिरा है। संबंधित विभाग से कोई नहीं आया। खुद ही जान को जोखिम में डालकर तार हटा रहे हैं। संवाद
घरों की छतों पर बसेरा, पूरा इलाका मलबे से भरा
जम्मू। राजीव कॉलोनी के हर घर की छत पर सामान का ढेर लगा है। ऐसा प्रतीत होता है कि लोग जैसे कमरे छोड़ कर छतों पर ही बस चुके हैं। दरअसल बारिश से लगभग हर घर में चार से पांच फुट मलबा है जिसे निकाल पाना लोगों को नामुमकिन लग रहा है।
घर के कमरे खोल कर सफाई करने के बजाए बचा-खुचा सामान लेकर लोग छतों पर बसेरा बना बैठे हैं। राजीव कॉलोनी निवासी रजनी शर्मा का कहना है कि बाड़ से बचकर घर को छोड़ कर चले गए। अगले दिन जब आए तो घर में लगभग चार फुट मलबा था। लगभग तीन लाख का सामान बरबाद हो चुका था। स्टेशनरी का काम करते हैं। घर पर माल स्टोर करके रखा होता है। सब बर्बाद हो गया। जो सामान बचा था उसे लेकर छत पर डेरा लगाया हुआ है। न तो बिजली है और न ही पानी। सुबह होती है तो सफाई करना शुरू करते हैं और अंधेरा होते ही छत पर लौट जाते हैं।
कॉलोनी में रहने वाले सुशील के अनुसार दुकान के साथ-साथ घर के सामान का नुकसान हुआ है। प्रशासन की तरफ से नाम नोट किए गए हैं मगर उसके बाद से कोई नहीं आया। ना ही कोई मदद दी गई है। घरों में चार से पांच फुट तक मलबा जमा है जिसके अंदर इंसान खुद धंस जाए। सरकार इसे निकालने में कोई मदद नहीं कर रही। लोग खुद से कितना ही कर सकते हैं। सुबह से लेकर शाम को तो बस सही सोचने में निकल रही है कि कैसे इस मलबे को हटाएं। वहीं करतार चंद ने बताया कि इलाके में लगभग 200 मकान भारी बारिश में प्रभावित होते हैं पर सरकार इसका कोई स्थायी हल नहीं ढूंढ रही। इस बार भी खुद के पैसों से सफाई करवा रहे हैं। मोहल्ले के ज्यादातर लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। ना ही इस आपदा के वक्त सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था की गई है।
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घरों में न पानी न बिजली, कैसे होगी सफाई
जम्मू। बारिश से प्रभावित इलाकों में तवी किनारे बसे गुज्जर नगर में भी काफी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से गलियों से मलबा हटाने के लिए जेसीबी लगाई गई हैं। मलबा इतना ज्यादा है कि चौथे दिन भी लोग घरों से और जेसीबी गलियों से मलबा निकाल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को घरों से भी मलबा निकालने की व्यवस्था करनी चाहिए। गुज्जर नगर निवासी रफीक का कहना है जलस्तर को बढ़ता देख परिवार सहित जान बचा कर भागे।
दूसरे दिन जब घर आए तो देखा कि घर के सामान सहित आठ मवेशी भी बह चुके थे। लगभग पांच लाख का नुकसान हुआ है। किसी विभाग का कोई कर्मचारी हाल जानने नहीं आया। परिवार के सभी सदस्य सुबह घर आते ही सफाई में जुट जाते हैं और शाम होते ही वापस रिश्तेदार के घर चले जाते हैं। वहीं रूबीना ने बताया कि बस जान बचाकर भागे। कीमती सामान भी नहीं निकाल पाए। अगले दिन जब वापस आए तो कमरों के बाहर लगभग चार से पांच फुट तक मलबा भरा था। भारी-भारी पत्थर तवी से बह कर घर में आ गए। मजदूर लगा कर सफाई करवा रहे हैं। ना बिजली है ना पानी। गृहस्थी मानो उजड़ ही गई है।
साईमा कहना है कि चार दिन लग गए केवल रसोई को वापस शुरू करने में। सब कुछ बर्बाद हो गया है। घर की निचले हिस्से में अभी भी काफी गंदगी और मलबा है। कम से कम बिजली और पानी ही आ जाता तो काफी राहत हो जाती। इसके बिना कैसे सफाई होगी।