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आप भी पढ़ें, श्रीनगर में बाढ़ से जुड़ी पहली अच्छी खबर

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पीएचई, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के आयुक्त सचिव डा. पवन कोतवाल ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के 90 फीसदी इलाकों को बाढ़ के पानी से मुक्त कर दिया गया है और अन्य क्षेत्रों में भी पंपों आदि के माध्यम से पानी को बाहर निकालने की प्रक्रिया जारी है।
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कोतवाल ने वीरवार को बाढ़ प्रभावित श्रीनगर शहर के विभिन्न इलाकों का दौरा कर बाढ़ के पानी को बाहर निकालने की प्रक्रिया का जायजा लिया।

कोतवाल ने कार्य की प्रगति पर संतोष प्रकट करते हुए संबंधित इंजीनियरों को और तेजी के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात को सामान्य बनाने के दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने इस कार्य में अतिरिक्त मशीनरी और मेन पावर लगाने को भी कहा।
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भविष्य में बाढ़ से बचने के इंतजाम

कोतवाल ने इंजीनियरों को बाढ़ के बाद की स्थिति पर पूरी सतर्कता बरतने की हिदायत भी दी। कोतवाल ने राजबाग, कुरसू राजबाग, जवाहर नगर, पादशाही बाग, गोगजीबाग, सोनवार, इंदिरा नगर और शिवपोरा आदि इलाकों का दौरा किया और स्थानीय लोगों से बातचीत कर अपील की कि वह विभागीय अमले के साथ मिलकर काम करें ताकि हालात को जल्द सामान्य किया जा सके।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वह निर्माण के दौरान म्यूनिस्पल नियमों का पूरी तरह से पालन करें ताकि इस तरह की स्थिति का फिर सामना न करना पड़े। कोतवाल ने कहा कि विभाग भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए लंबी अवधि की योजनाओं पर काम करेगा और नई तकनीकों का सहारा भी लिया जाएगा।
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ज्यादा था पानी का स्तर और बहाव

कोतवाल ने कहा कि विभाग ने समय पर बाढ़ को नियंत्रण करने के लिए कदम उठाये थे मगर बाढ़ के पानी का स्तर और बहाव इतना तीव्र था कि वह नियंत्रित नहीं किया सका। उन्होंने कहा कि श्रीनगर के अधिकतर इलाकों में पेयजल आपूर्ति को बहाल कर दिया गया है।

कई इलाके अभी भी प्रभावित है और वहां पर पाइपों की मरम्मत कर आपूर्ति को बहाल किया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पीएचई, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के ढांचों को प्रांरभिक नुकसान के आकलन के अनुसार 2614 करोड़ का नुकसान हुआ है।
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