जीएमसी में कंपोनेंट लैब की कवायद तेज हो गई है। इस कड़ी में अस्पताल के ब्लड बैंक में आधुनिक एफेरासिस मशीन पहुंच गई है। इस मशीन से ब्लड कंपोनेंट तैयार किए जाएंगे।
यह मशीन डेंगू के मरीजों के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। पिछले साल एक हजार से ज्यादा डेंगू के पाजिटिव मामले आने पर पीड़ितों को एकमात्र एसएमजीएस अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ा था।
संभाग स्तर पर इसी अस्पताल में खून के प्लेटलेट्स बनाने की सुविधा उपलब्ध है। जीएमसी ब्लड बैंक के एचओडी डा. विजय साहनी के अनुसार मशीन के लिए तकनीकी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संभाग की लाखों की आबादी के लिए एसएमजीएस अस्पताल जम्मू में एकमात्र कंपोनेंट लैब स्थापित है। होल सेक्शन में किसी भी व्यक्ति से खून लेकर मरीज को चढ़ाया जाता है। इस खून में सभी तरह के खून का मिश्रण होता है।
मगर कंपोनेंट में होल खून के पैकेट से साथ में जुड़े अलग अलग पैकेटों में रेड ब्लड सेल (पैकेड सेल), वाइट ब्लड, प्लेटलेट्स, एफएफपी (फ्रेश फ्रोजन प्लाजा) को आधुनिक मशीनों में डालकर अलग कर दिया जाता है।
अधिकांश गायनी और गंभीर मरीजों को कंपोनेंट खून की जरूरत अधिक होती है। जिससे एकमात्र कंपोनेंट सेक्शन होने से जिला स्तर पर ऐसे मरीजों को मजबूरन मीलों सफर तय करके जम्मू आना पड़ता है।
वहीं, गांधीनगर अस्पताल में कंपोनेंट लैब का प्रोजेक्ट अधर में है। स्वास्थ्य विभाग में यहां किसी पहले अस्पताल में इस लैब को स्थापित करने की कवायद की गई थी। लेकिन ढांचा तैयार करने के बाद उपकरण न आने से लैब शुरू नहीं हो पाई है।