संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी में लिफ्टों की समस्या बरकरार है। अस्पताल में कई लिफ्टें बंद पड़ी हैं, जिससे तीमारदारों को वार्डों या लैबोरेटरी में टेस्ट के लिए सीढि़यों या रैंप का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रिंसिपल कार्यालय की ओर से कई महीनों से बंद पड़ी लिफ्टों को दुरुस्त करने के लिए कुछ नहीं किया गया है।
अस्पताल के भीतर कैंटीन की तरफ लिफ्टें नियमित नहीं चल रही हैं। बताया जाता है कि मेकेनिकल विंग के साथ मेंटेनेंस चार्जेज समझौता न होने के कारण लिफ्टों के चलने का मामला अधर में लटका है। जीएमसी के अधीक्षक डॉ. रविंद्र रतनपाल के अनुसार अस्पताल की कुछ पुरानी लिफ्टों की जगह नई लिफ्टें लगाई जा रही हैं।
मेडिकल कालेज जम्मू में प्रिंसिपल कार्यालय की ओर ऊपर के छह फ्लोर तक जाने के लिए दोनों लिफ्टें कई माह से बंद पड़ी हैं। इन्हीं लिफ्टों से छह फ्लोर तक माइक्रोबायोलाजी, बायो केमिस्ट्री, पैथोलोजी, पीएसएम पीजी, फार्माकोलाजी आदि महत्वपूर्ण विभागों तक पहुंचा जाता है।
इसमें माइक्रोबायोलाजी और बायोकेमिस्ट्री, पैथालोजी विभागों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग विभिन्न तरह के टेस्ट करवाने के लिए पहुंचते हैं। कइयों में मरीज को खुद पहुंचना पड़ता है, लेकिन लिफ्टें बंद होने से तीमारदारों को मजबूरन रैंप या सीढि़यों के सहारे इन फ्लोर तक पहुंचना पड़ रहा है।
इसी तरह अस्पताल के भीतर कैंटीन वाली तरफ से एक लिफ्ट ही काम कर रही है, जबकि दूसरे को अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे मरीजों को ऊपर के फ्लोर पर 15 वार्डों में अपने मरीजों को रैंप का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा जो लिफ्टें काम कर रही हैं वे भी आए दिन जवाब दे जाती हैं।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले नए इमरजेंसी ब्लाक की लिफ्ट कई हफ्तों तक बंद रही थीं, जिससे मरीजों के साथ तीमारदारों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी थीं।