संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी में हाल ही में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्थापित किए गए गैस प्लांट ने जवाब दे दिया है। ऐसी स्थिति में अस्पताल के महत्वपूर्ण यूनिटों में सिलेंडरों से ही आक्सीजन की सप्लाई की जा रही है। अस्पताल में गैस प्लांट होने के बावजूद बाजार से सिलेंडरों की सप्लाई लेना मजबूरी बन गया है।
जीएमसी के मैकेनिकल विंग के एईई तारिक रैना का कहना है कि पिछले दिनों आंधी तूफान से प्लांट के स्ट्रेलाइजर में तकनीकी दिक्कत से थोड़ी समस्या आई है, जिसे जल्द दुरुस्त बना लिया जाएगा। प्लांट को फिलहाल टेस्टिंग पर चलाया जा रहा है। प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता कहना है कि प्लांट को चलाने की जिम्मेदारी मैकेनिकल विंग की होती है। अलबत्ता मरीजों की सहूलियत के लिए सभी इंतजाम किए गए हैं।
अस्पताल के इमरजेंसी और जनरल आपरेशन थियेटरों, आईसीयू, इमरजेंसी, सीसीयू सहित अन्य महत्वपूर्ण यूनिटों में गैस प्लांट से पाइप सिस्टम में आक्सीजन की सप्लाई दी जाती है। इन यूनिटों में अधिकांश मरीज गंभीर होते हैं। जिन्हें इलाज में नियमित आक्सीजन देना पड़ता है। अस्पताल में इस चिकित्सा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में नया गैस प्लांट स्थापित किया गया था, लेकिन कुछ देर चलने के बाद प्लांट बंद हो गया है।
आक्सीजन की सप्लाई जारी रखने के लिए बाजार से रोजाना सिलेंडर मंगवाए जा रहे हैं। इसमें औसतन रोजाना पचास बड़े सिलेंडरों की खपत हो रही है, जिसमें एक घंटे में 2-3 सिलेंडर चल रहे हैं। जीएमसी के साथ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और एसएमजीएस में भी करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नए गैस प्लांट स्थापित किए गए हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि आधुनिक प्रणाली से विकसित ऐसे महंगे उपकरण इतनी जल्दी क्यों हांफ रहे हैं।