मोदी सरकार ने पूरे देश में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के लिए अभियान चला रखा है, लेकिन रियासत की बिलावर तहसील की बग्गन पंचायत की लड़कियों के लिए इसके कोई मायने नहीं नजर आते हैं।
यहां लड़कियां उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं, उनके माता-पिता भी अपनी बच्चियों को तालीम दिलाना चाहते हैं, लेकिन वहां हाई स्कूल के बाद आगे की शिक्षा के लिए स्कूल-कालेज नहीं होने से वे आगे नहीं पढ़ पातीं हैं।
लड़के तो किसी तरह बिलावर से अप-डाउन कर लेते हैं। जो सुविध संपन्न हैं, उनके लिए भी कोई मुश्किल नहीं है। लेकिन, आम घरों की लड़कियों के लिए हायर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षा हासिल करना बड़ा मुश्किल भरा सफर है।
इस समय बग्गन और आसपास के इलाकों से प्रतिदिन 50 से ज्यादा लड़के हायर सेकेंडरी स्कूल और डिग्री कालेज में शिक्षा के लिए जाते हैं, लेकिन उनमें लड़कियां नहीं होती हैं।
पुरुष प्रधान सोच बन रही है बाधक
बग्गन से बिलावर की दूरी वैसे तो 20 किलोमीटर के आसपास ही है, लेकिन यह मामूली दूरी आम घरों की लड़कियों के लिए काफी ज्यादा हो जाती है। समाज की रूढ़िवादी और पुरुष प्रधान सोच, लड़कियों के साथ आए दिन होने वाले हादसे आदि कई ऐसी बातें हैं, जो लड़कियों की शिक्षा के रास्ते में बाधक हैं।
बिलावर में लड़कियों के लिए हास्टल की सुविधा भी नहीं है। वहां कमरा लेकर रहना आम घरों की लड़कियों के लिए बेहद मुश्किल है। रोज आने-जाने का किराया भी उनके लिए ज्यादा हो जाता है, ऐसे में ग्रामीणों ने सरकार से बग्गन हाई स्कूल का दर्जा बढ़ाकर हायर सेकेंडरी स्कूल करने की मांग की।
रमेश सिंह, तिलक राज, गुलशन कुमार, बोधराज आदि ने बताया कि पिछले साल तत्कालीन सहकारिता मंत्री डॉ. मनोहर लाल शर्मा ने बग्गन हाई स्कूल का दर्जा बढ़ाकर हायर सेकेंडरी स्कूल करने की घोषणा भी की थी, लेकिन आज तक इस पर अमल नहीं हुआ।
अब ग्रामीणों ने राज्यपाल से उनकी मांग को पूरा करने की मांग की है। जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती सब डिवीजन मुख्यालय पर विद्यार्थियों के ठहरने के लिए एक ब्वायज और एक गर्ल्स हास्टल बनवाने की मांग की गई है।