एनटोन चेखव की प्रसिद्ध रूसी लघु कहानी पर आधारित नाटक गिरगिट का नटरंग के संडे थियेटर में मंचन किया गया। इसका निर्देशन नीरज कांत ने किया। नाटक सामाजिक-राजनीतिक प्रणाली पर कड़ा व्यंग्य था, जिसने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।
गिरगिट की कहानी एक कुत्ते और पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका हर स्थिति में रंग बदलता रहता है। कहानी चोर को कुत्ता काटने से शुरू होती है। चोर पुलिस अधिकारी के पास मदद के लिए पहुंचता है और कुत्ते के मालिक से मुआवजा दिलाने की बात करता है।
इस पर एक राहगीर कहता है कि कुत्ता मंत्री जी का है। इस बात पर अधिकारी चोर की पिटाई शुरू कर देता है कि उसने इज्जतदार कुत्ते को काटने के लिए उकसाया होगा, क्योंकि मंत्री जी का कुत्ता तब तक किसी को नहीं काटेगा, जब तक कि उसे उकसाया न जाए।
इसी दौरान कोई कहता है कि यह मंत्री का कुत्ता नहीं हो सकता, क्योंकि वह प्वाइंटर नस्ल के शिकारी कुत्ते रखने के शौकीन हैं। इस पर अधिकारी कुत्ते की पिटाई करता है। फिर कुत्ते के मालिक की तलाश शुरू हो जाती है, ताकि चोर को मुआवजा दिलाया जा सके। कुत्ते की पिटाई जारी रहती है।
इसी दौरान मंत्री का एक नौकर आता है और कहता है कि कुत्ता मंत्री के भाई का है, जो दिल्ली से आए हैं। इस पर अधिकारी फिर से रंग बदलता है और कुत्ते को इज्जत के साथ उनके घर छोड़ता है।