उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले का सोपोर इलाका अलगाववादियों का गढ़ समझा जाता है। अलगाववादियों की डोर संभालने वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी भी सोपोर के हैं। इसलिए यहां चुनाव बहिष्कार का असर देखने को मिलता है। लेकिन, इस बार स्थिति कुछ और दिखने वाली है, क्योंकि भाजपा ने सोपोर में भी प्रत्याशी खड़ा करने की ठानी है।
भाजपा द्वारा सोपोर में प्रत्याशी खड़े किए जाने के विचार पर नेशनल कांफ्रेंस के खेमे में खलबली-सी मच गई है। उन्हें लगता है कि कहीं भाजपा सोपोर में घुसपैठ करने में सफल न हो जाए। नेकां के सोपोर से प्रत्याशी हाजी मोहम्मद अशरफ ने इसी चिंता के चलते यहां तक कह डाला कि ऐसा होना हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के लिए एक धक्का साबित हो सकता है।
अशरफ ने एक खास बातचीत के दौरान कहा कि मैं सैयद अली शाह गिलानी से अनुरोध करता हूं कि वह चुनाव बहिष्कार की दी गई कॉल पर एक बार फिर से विचार करें। अशरफ के अनुसार अगर लोग मतदान करेंगे, तो भाजपा का जीतने का सवाल नहीं और अगर चुनाव बहिष्कार होता है तो माइग्रेंट वोट के कारण भाजपा जीत सकती है।
हाजी मोहम्मद अशरफ ने यह भी स्वीकारा कि वर्ष 2008 से वह विधायक रहे, लेकिन तब से वह कभी भी इलाके में खुलेआम नहीं घूम सके, क्योंकि इलाके में भारत विरोधी मानसिकता है। खासकर युवा मतदान में भाग लेना नहीं चाहते।