पिछले 21 माह से बापू एक कमरे में कैद हैं। उन्हें लाल रंग के एक कपड़े में टेबल पर लपेट कर रखा गया है। देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले इस महान शख्सियत को दो अक्तूबर को याद किया जाएगा। लेकिन इस बार भी गांधी जयंती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा से दीवान-ए-आम मुबारक मंडी अछूता रहेगा।
मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार कार्य के दौरान चबूतरे से बापू की प्रतिमा को करीब दो साल पहले उठाकर अभिलेखागार पुरातत्व संग्रहालय विभाग के एक कमरे में रखा था, जो आज भी खुद के दोबारा वहां स्थापित होने का इंतजार कर रही है।
मुबारक मंडी के चबूतरे (थड़े) पर गांधी जयंती पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से बापू को याद किया जाता था। लेकिन जनवरी 2014 से इस पर लगाम लग गया।
तब चबूतरे के जीर्णोद्धार के लिए उसे तोड़कर बापू की प्रतिमा को उक्त विभाग के एक कमरे में रखवा दिया गया। लेकिन उसके कुछ माह बाद चबूतरे का निर्माण भी रुकवा दिया गया और बापू की प्रतिमा को दोबारा वहां स्थापित करने के लिए सिर्फ इंतजार ही होता रहा है।