सूबेदार करनैल सिंह गांव छिबू चक के पहले शहीद हैं। इस बात का गांव के हर शख्स को फख्र है। यहां तक कि शहीद के परिवार को भी शहादत पर नाज है, लेकिन अब तक न तो सीएम और न ही डिप्टी सीएम शहीद के घर पहुंचे। इसे लेकर परिवार को दुख है।
शहीद के भतीजे कुलदीप सैनी का कहना है कि आतंकियों से ज्यादा सरकार के रवैये से दुख पहुंचा है। किसी पत्थरबाज की जान चली जाए तो मुख्यमंत्री और तमाम नेता उनके घर पहुंच जाते हैं, लेकिन एक जवान ने देश के लिए जान दी, उसकी तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया।
कुलदीप का कहना है कि वह ही नहीं, बल्कि पूरा गांव हैरान है। पहला शहीद कहलाने के बावजूद उनके चाचा के घर सीएम या फिर डिप्टी सीएम नहीं आए।
सिर्फ एक सांसद जुगल किशोर अंतिम संस्कार के दिन कुछ पलों के लिए घर पहुंचे। कोई देश के लिए शहीद हो तो कम से कम उसके परिवार को सांत्वना देना तो बनता है, लेकिन सरकार के रवैये से दुख पहुंचा है। सरकार का कोई मंत्री भी उनके घर नहीं पहुंचा जो शहीद के परिवार के प्रति ढांढस बंधा सके।
शहीद करनैल के दोस्तों और उनके साथ नौकरी कर चुके पूर्व सैनिकों को भी रोष है। गांव के लोगों का भी कहना है कि शहीद के साथ भेदभाव किया गया है। कोई बड़ा जनप्रतिनिधि उनके घर नहीं आया।