हाईवे पर गिरे मलबे को हटाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मशीनरी और कर्मचारियों को मौके पर तैनात किया है। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि जब तक हाईवे को सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक यात्रा से बचें, क्योंकि आगे भी भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है।
हालांकि, अमरनाथ यात्रा के लिए बालटाल बेस कैंप जा रहे 3,823 श्रद्धालुओं के काफिले को सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रभावित हिस्से से गुजरने की अनुमति दी गई। अधिकारियों ने बताया कि एक तरफ का रास्ता बहाल कर काफिले को आगे बढ़ाया गया।
इससे पहले भारी बारिश के कारण जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर कई स्थानों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाओं के चलते तीन दिनों तक यातायात बंद रहा था। रविवार को यातायात बहाल किया गया था, लेकिन दोबारा मलबा हटाने के काम के चलते आवाजाही रोकनी पड़ी। वहीं, डोडा जिले में स्थित पुल डोडा पुल को सुरक्षा जांच के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। पुल पर दरारें दिखाई देने की सूचना के बाद अधिकारियों ने एहतियातन वाहनों की आवाजाही रोक दी।
पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता अनिल मेहरा ने बताया कि शुरुआती जांच में ये दरारें संरचनात्मक नहीं पाई गई हैं, बल्कि निर्माण के दौरान शटरिंग जॉइंट पर कंक्रीट ओवरलैप के कारण निशान हो सकते हैं। पुल की पूरी सुरक्षा जांच के लिए विशेषज्ञ टीम को भी बुलाया गया है। अधिकारियों ने कहा कि विशेषज्ञों की मंजूरी के बाद ही पुल को दोबारा यातायात के लिए खोला जाएगा। फिलहाल वाहनों को वैकल्पिक गणपत पुल से भेजा जा रहा है।