घाटी में ताबड़तोड़ आतंकी घटनाओं तथा वर्दी को निशाना बनाए जाने के मद्देनजर सुरक्षा बलों ने अब मांद से निकालकर आतंकियों का काम तमाम करने की रणनीति बनाई है। इसके लिए सुरक्षा बलों को खुली छूट दी गई है।
खासकर दक्षिणी कश्मीर में अब सुरक्षा बल आतंकियों तथा उनके मददगारों के खिलाफ व्यापक पैमाने पर अभियान चलाएंगे। राज्य के डीजीपी ने साफ तौर पर कहा है कि पिछले दो दिनों में आठ पुलिसकर्मियों की शहादत को बेकार नहीं जाने दिया जाएगा। आतंक का खात्मा होगा और आतंकियों को करारा जवाब दिया जाएगा।
घाटी में नौ दिन में 15 आतंकी हमले हुए हैं। दक्षिणी कश्मीर के अच्छाबल इलाके में शुक्रवार को हमले में छह पुलिसकर्मियों के मारे जाने और करीब से गोली मारकर चेहरे को क्षत-विक्षत करने की घटना ने आग में घी का काम किया।
200 से अधिक आतंकियों की सूचना इकठ्ठा करने का काम शुरू
भारतीय सेना (फाइल फोटो)
सूत्रों के अनुसार इससे बौखलाए सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ मुहिम को तेज करने की रणनीति अपनाई है। इसके तहत दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां तथा कुलगाम जिले में सक्रिय 200 से अधिक आतंकियों के बारे में ताजा सूचनाएं एकत्र करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उनके ठिकानों, मददगारों तथा ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वर्कर) की हर पल की गतिविधियों के बारे में जानकारी लेने को कहा गया है। रणनीति के तहत घेरेबंदी और तलाशी अभियान (कासो) को और तेज किया जाएगा।
सूचना मिलने के फौरन बाद बिना समय गंवाए आतंकियों के खिलाफ मुहिम को अंजाम देने की रणनीति पर काम करने को कहा गया है। राज्य के डिप्टी सीएम डा. निर्मल सिंह का भी कहना है कि आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया जाएगा। हमलों को नाकाम करने तथा आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
ड्रोन की मदद से तलाशे जाएंगे आतंकी
ड्रोन की ली जाएगी मदद
- फोटो : प्रतीकात्मक चित्र
कहा जा रहा है कि पवित्र रमजान माह में राज्य पुलिस के जवानों के साथ बर्बरता से आम कश्मीरी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। आशंका जताई जा रही है कि आतंकियों के प्रति साफ्ट कार्नर रखने वाले कश्मीरी आतंकियों से दूरी भी बना सकते हैं। ऐसे में उन्हें भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
घाटी में आतंकियों को ढूंढ़ निकालने के लिए ड्रोन की मदद ली जाएगी। घटना को अंजाम देने के बाद घने जंगलों में जा छिपने वाले आतंकियों की सटीक लोकेशन पता कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। खासकर दक्षिणी कश्मीर में आतंकवाद पर काबू पाने के लिए यह तरीका अपनाया जाएगा।