रियासत में फर्जी गन लाइसेंस के रैकेट के सक्रिय होने की जांच सीबीआई को सौंपे जाने का राज्य सरकार की ओर से सीबीआई को पत्र भेजा गया है। फिलहाल यह पता नहीं चल सका है कि सीबीआई ने इस मामले को जांच के लिए स्वीकार किया है या नहीं। हालांकि, डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने बताया कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है।
जम्मू के तत्कालीन डीसी राजीव रंजीव के भाई से फर्जी आर्म्स लाइसेंस बरामद होने के बाद केस की विजिलेंस ने भी जांच शुरू की। विजिलेंस द्वारा जम्मू कश्मीर के कई जिले उधमपुर, शोपियां, राजोरी, कुपवाड़ा आदि से फर्जी लाइसेंस जारी करने की रिपोर्ट और देश के कई हिस्सों में लाइसेंस दिए जाने के बाद राज्य गृह विभाग ने लाइसेंस जारी करने पर जून महीने में रोक लगा दी।
रोक लगाने के बाद कई गन डीलरों व लाइसेंस धारकों का धंधा बंद हो गया। पिछले छह महीने से हालांकि राजस्थान एटीएस फर्जी ने जम्मू के डीसी के भाई के पकड़े जाने के बाद इस केस को सीबीआई को सौंपने की केंद्रीय गृह मंत्रालय से अपील कर रही थी। हालांकि आपरेशन जुबैदा के तहत राजस्थान एटीएम 3500 के करीब फर्जी गन लाइसेंस जब्त कर चुकी है, जो अधिकतर जम्मू कश्मीर से जारी किए गए थे।
नापे जाएंगे गन डीलर और फैक्ट्री मालिक
जम्मू-कश्मीर से पिछले एक दशक से एक लाख से भी अधिक लाइसेंस जारी करने के बाद कई गन डीलर और फैक्ट्री मालिक नापे जा सकते हैं। सीबीआई को केस सौंपने के बाद इनसे भी पूछताछ होगी। जिन लोगों ने फर्जी गन लाइसेंस जारी किए होंगे, उनके खिलाफ सीबीआई केस दर्ज करेगी। रैकेट में जम्मू कश्मीर के कई गन डीलर शामिल हैं।