घाटी के ऊंचाई वाले इलाकों में बैंगनी, गुलाबी और सफेद रंग के घंटी जैसे फूलों के बड़े-बड़े पैच खिलने से यहां का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर गया है। जाई वैली, गुलडांडा, थानथेरा, हंगा, पदरी, भल पदरी और अन्य क्षेत्रों में ये फूल बड़ी मात्रा में देखे जा रहे हैं।
इन मनमोहक फूलों को देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक भद्रवाह पहुंच रहे हैं। महाराष्ट्र, नागपुर और अन्य राज्यों से आए पर्यटकों ने इसे 'यूरोप जैसा अनुभव' और 'परियों की दुनिया जैसा दृश्य' बताया है।
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि इस प्राकृतिक सौंदर्य का सही तरीके से प्रचार-प्रसार किया जाए तो भद्रवाह जम्मू-कश्मीर का एक प्रमुख फ्लोरल टूरिज्म डेस्टिनेशन बन सकता है।
एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स ने भी प्रशासन से अपील की है कि इस प्राकृतिक आकर्षण को बढ़ावा दिया जाए, क्योंकि यहां अप्रैल से जून तक लगभग तीन महीने तक ये फूल प्राकृतिक रूप से खिलते हैं।
भद्रवाह विकास प्राधिकरण के सीईओ संजीव शर्मा ने बताया कि माना जाता है कि 19वीं सदी में यूरोपीय यात्रियों के माध्यम से इन फूलों के बीज यहां पहुंचे थे, जिसके कारण आज यह घाटी इतनी समृद्ध हो गई है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन इस प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है और इसी महीने के अंत तक फॉक्सग्लोव फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है, जिससे अधिक से अधिक पर्यटक आकर्षित हो सकें।