घाटी में लक्षित हत्याओं (टारगेट किलिंग) में शामिल द रजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) व मुजाहिदीन गजवा तुल हिंद (एमजीएच) के मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए सुरक्षा बलों ने चार आतंकियों को गिरफ्तार किया है। यह मॉड्यूल पाकिस्तान तथा सऊदी अरब में बैठे हैंडलरों के इशारे पर काम कर रहा था। गिरोह के सदस्यों ने दिल्ली के एनआईए दफ्तर, पुलिस मुख्यालय समेत अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी कर गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान को भेजे हैं। पकड़े गए इस मॉड्यूल से चार पिस्टल, भारी मात्रा में गोलियां तथा पिस्टल के साइलेंसर मिले हैं।
आतंकियों को बारजुला पुल के पास से गिरफ्तार किया गया
दो पिस्टल, दो मैगजीन तथा 30 गोलियां बरामद
इनकी पहचान पुलवामा के त्राल के सुहैल कादिर खांडे व पुलवामा के निकलूरा के मुश्ताक अहमद वाजा के रूप में हुई। तलाशी में इनके पास से दो पिस्टल, दो मैगजीन तथा 30 गोलियां बरामद की गईं। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार पूछताछ के आधार पर शहर में बनाए गए ठिकाने से और दो पिस्टल, छह मैगजीन, 69 गोलियां तथा पिस्टल साइलेंसर बरामद किए गए। इस मामले में चार पिस्टल, आठ मैगजीन, 99 गोलियां तथा दो पिस्टल साइलेंसर बरामद हो चुके हैं।
पूछताछ में उन्होंने बताया कि उनके दो मददगार कमरवाड़ी के बासित बिलाल माकाया व शोपियां के किलूरा के नायकू इमाद नसर भी हैं। नाम सामने आने के बाद इन दोनों मददगारों को भी पकड़ा गया। आतंकियों ने बताया कि वे श्रीनगर शहर में अपनी गतिविधियां संचालित करते थे। यह गिरोह सऊदी अरब धमम निवासी आसिफ मकबूल डार (मूल निवासी एमआईजी कॉलोनी बेमिना) तथा पाकिस्तान के सज्जाद गुल (मूल निवासी एचएमटी पारिमपोरा) के इशारे पर शहर में गतिविधियां करते थे।
दोनों हैंडलर पाकिस्तान व सऊदी अरब से इन्हें ओजीडब्ल्यू नेटवर्क के जरिये हथियार व पैसा उपलब्ध कराते थे। उन्होंने एनआईए दफ्तर, दिल्ली पुलिस मुख्यालय की रेकी भी की है। शहर में हत्याओं के लिए टारगेट भी डा. आसिफ व सज्जाद गुल ही चयनित करते थे और गिरोह को इसकी सूचना देते थे।
सुहैल हथियारों को लेने तथा हमलों के लिए करता था समन्वय
पुलिस के अनुसार सऊदी अरब में डा. आसिफ डार के साथ सुहैल कादर खांडे काम करता था। आसिफ के निर्देश पर ही वह अगस्त 2021 में श्रीनगर आया और टीआरएफ व एमजीएच के लिए काम करने लगा। इस दौरान वह हथियारों व असलहे तथा पैसे की वसूली तथा हमलों के लिए समन्वय का काम करता था।
आसिफ के खिलाफ पहले से ही तीन मामले श्रीनगर में दर्ज हैं। यह सब सरकारी प्रतिष्ठानों के खिलाफ भड़काऊ भाषा के इस्तेमाल से संबंधित हैं। साथ ही विभिन्न समुदायों के बीच घृणा का वातावरण बनाया जा सके। पहली बार आसिफ का नाम आतंकवाद से जुड़े किसी मामले में प्रत्यक्ष रूप से सामने आया है। - विजय कुमार, आईजी कश्मीर