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Jammu News: पूर्व सैनिक बोले... सिर्फ वर्दी पहनना छोड़ा है, देश की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक तैयार

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अमर उजाला ब्यूरो
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जम्मू। ऑपरेशन सिंदूर ने पूरे विश्व को अहसास करा दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाने में विश्वास रखता है। यह बात जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विसेज लीग की वार्षिक आम बैठक में पूर्व सैनिकों ने कही। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों ने सिर्फ वर्दी पहनना छोड़ा है, वह देश की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक लड़ने को तैयार हैं।
वार्षिक आम बैठक अंबफला में त्रिकुटा यात्री निवास में हुई। इसमें प्रदेश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। अपने मुद्दों पर चर्चा की और एक साल की उपलब्धियों को उजागर किया। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने एक सुर में कहा कि सरकार और सेना हमारी सेवाएं किसी भी समय ले सकती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए चार हजार पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेना पूर्व सैनिकों के संघर्षों की जीत है।
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जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विसेज लीग के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल आरके शर्मा एवीएसएम, एसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही हम सरकार से पूर्व सैनिकों की सेवाएं लेने की बात कर रहे थे। इससे पूर्व सैनिकों को आर्थिक मदद भी मिलेगी। उन्हें अपने जिले में ही सम्मानजनक नौकरी मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त के बाद एक सैनिकों की दिनचर्या, अनुशासन एक कार्यरत सैनिक की तरह ही रहती है। पूर्व सैनिक अपने देश की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक लड़ने के लिए तैयार है।
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भावना और संवेदना पर नहीं लड़े जाते हैं युद्ध: आरके शर्मा
लेफ्टिनेंट जनरल आरके शर्मा एवीएसएम, एसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सीजफायर करना हमारा सबसे अच्छा कदम था। उन्होंने कहा कि युद्ध भावना और संवेदना पर नहीं लड़े जाते हैं। देश को बहुत कुछ देखना पड़ता है। ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने का हमारा उद्देश्य पाकिस्तान की पनाह में बैठे आतंकियों को मार गिराना था। हम नौ आतंकी ठिकाने गिराने में कामयाब रहे। इसके बाद पाकिस्तान से दुस्साहस किया, जिसका हमने मुंहतोड़ जवाब दिया। हमने भीख में पाकिस्तान को सीजफायर दिया। चीन और तुर्किये जैसे देश चाहते हैं युद्ध लंबा खिंचे, लेकिन हमने उनके इरादों को कामयाब नहीं होना दिया।
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इन मुद्दों पर हुई चर्चा
पूर्व सैनिकों के बच्चों की शिक्षा मिले। इसके लिए आर्मी पब्लिक स्कूल में सीटों की संख्या बढ़े।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में आर्मी स्किल डिवलेपमेंट सेंटर खुलें ताकि युवाओं को रोजगार मिले।
पूर्व सैनिकों के हथियारों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो रहा। इसके लिए पोर्टल छह महीने या एक साल में एक बार खोला जाए।
जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विसेज लीग के पास अपना भवन नहीं, सरकार इसमें मदद करे।
जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विसेज लीग की सदस्यता अभियान को बढ़ाने पर दिया जोर।
पूर्व सैनिकों के बच्चों को छात्रवृत्ति मिलती है, लेकिन आवेदन कम आने हैं, पूर्व सैनिक इसका ज्यादा लाभ लें।
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