पूर्व मुख्यमंत्री का परिवार सरकारी आवास पहले ही खाली कर चुका है।
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एस्टेट विभाग द्वारा पूर्व मंत्रियों को नोटिस, कहा एक हफ्ते में सरकारी बंगले खली करें। जम्मू कश्मीर में सरकार गठन को लेकर गतिरोध के बीच एस्टेट विभाग ने पीडीपी और भाजपा सरकार के पूर्व मंत्रियों को नोटिस जारी कर उन्हें बिना देरी किए सरकारी बंगलों खाली करने के लिए कहा है।
पूर्व मंत्रियों का कहना है कि उन्हें वैकल्पिक निवास दिए जाएं। वहीं इस मुद्दे पर जम्मू कश्मीर के मुख्य विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस ने पूर्व मंत्रियों को घेरा। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद से राज्य में सरकार गठन को लेकर कई बार संभावनाएं जताई गई, लेकिन हर बार कुछ भी ठोस नहीं निकल कर आया।
इस बीच राज्य में पिछले दो महीनों से राज्यपाल शासन लागू किया गया और इसके बावजूद भी पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के मंत्रियों ने अभी तक उनके सरकारी आवास खाली नहीं किए। इसको लेकर एस्टेट विभाग द्वारा पिछली सरकार के कैबिनेट और राज्य मंत्रियों दोनो को उनके सरकारी आवास खाली करने के लिए नोटिस भेज दिया गया है।
स्टेट विभाग वैकल्पिक निवास रहने के लिए दे
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वहीं इस मुद्दे पर जहां कई पूर्व मंत्री सहमति जताते हुए अपने सरकारी आवास खाली करने को तैयार हैं, तो कई मंत्री यह भी कह रहे हैं कि उनको अब तक कोई नोटिस नहीं मिला है। पीडीपी के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री अब्दुल हक खान के अनुसार उन्हें कोई नोटिस अभी तक मिली नहीं है।
अगर नोटिस मिल भी जाती है तो मुझे कोई ऐतराज नहीं होगा सरकारी आवास खाली करने में, लेकिन जिनके पास रहने के लिए अपने घर नहीं उन्हें एस्टेट विभाग वैकल्पिक निवास रहने के लिए दे।
इस बीच विपक्ष ने पीडीपी-भाजपा के पूर्व मंत्रियों को इस मुद्दे पर घेर लिया है। विपक्षी दल नेशनल कांफ्रेंस के जनरल सेक्रेट्री अली मोहम्मद सागर ने कहा कि राज्यपाल ने जो भी निर्देश दिए हैं वो कानून को मध्यनजर रखते हुए दिए होंगें।
पीडीपी अध्यक्षा महबूबा मुफ्ती
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जो भी नियम हैं सरकारी आवास रखने के उनके तहत ही उन्होंने पूर्व मंत्रियों को लिखा है। ऐसे में जो नियम हैं उनका पालन किया जाना चाहिए। सागर ने कहा कि इसमें 15 दिन का अवसर होता है और अधिकतर एक महीने का समय दिया जाता है सामान्य रूप से, लेकिन अगर कोई मामला हो या फिर कोर्ट में विचाराधीन हो तो उसमें अलग बात है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है और दो महीने का समय अब बीत चुका है इसलिए वह जल्द बंगले खाली करें।
गौरतलब है कि एस्टेट विभाग के अनुसार पूर्व मंत्री उनके सरकारी आवास में महीने तक रहने के हकदार थे और उस अवधि के दौरान खाली करने वाले थे लेकिन जम्मू में मुख्यमंत्री आवास को उनके परिवार द्वारा खाली किए जाने को छोड़कर एक भी सरकारी आवास को खाली नहीं किया गया है।