सेना को देना चाहते थे 150 स्नाइपर राइफल
पूर्व डीजीपी कहते हैं कि पुलिस की नौकरी में लगातार राजनीतिक नेतृत्व का दबाव झेलना पड़ता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला, मुफ्ती मोहम्मद सईद, गुलाम नबी आजाद, उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती के साथ काम किया। कई बार दबाव आए लेकिन उन्होंने सभी को टैकल किया और फैसले नहीं बदले। इसके साथ ही वह एक घटना बताते हुए अफसोस भी जताते हैं।
उनके मुताबिक, पाकिस्तानी सेना जब हमारे जवानों को स्नाइपर से अधिक निशाने बनाने लगी तो सेना ने स्नाइपर राइफल की मदद मांगी थी। हमारे पास तकरीबन 150 राइफलें थीं, जो डीजीपी रहते एसओजी के लिए मंगाई गई थी। इस पर सेना को राइफलें देने के लिए तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व से बात की लेकिन उन्होंने कोई भी जवाब नहीं दिया। उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन इशारा पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर था।
पाकिस्तान के इशारे पर आसिया ने तैयार की थीं महिला पत्थरबाज
हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में अशांति के लिए पाकिस्तान के कहने पर महिला अलगाववादी आसिया अंद्राबी ने महिला पत्थरबाजों की फौज तैयार की थी। इसके लिए महिला कॉलेजों में खासतौर पर टीम तैयार की गई थी। पुलिस ने टीम में शामिल छात्राओं को समझाया। प्रिंसिपलों और अभिभावकों से बातचीत की। इस तरह धीरे-धीरे महिलाओं की ओर से पत्थरबाजी की घटनाओं पर अंकुश पाने में कामयाबी मिली।
अजहर मसूद को दिल पर बोझ लेकर पहुंचाया था एयरपोर्ट
पूर्व डीजीपी कहते हैं कि आतंकी अजहर मसूद को कंधार कांड के दौरान छोड़े जाने का मलाल है। वह उस समय जम्मू के डीआईजी थे और अजहर मसूद कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद था। उसे लेने के लिए दिल्ली से स्पेशल प्लेन टेक्निकल एयरपोर्ट आ चुका था। उसे वहां तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। उस समय उन्होंने दिल पर भारी बोझ लेकर उसे एयरपोर्ट तक पहुंचाया था। यह उन्हें कभी भूलता नहीं है।