अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। कर्ज वितरण में पीछे चल रहे सेक्टरों को सुधारने के लिए जिला स्तर पर नई रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत कृषि, एमएसएमई, शिक्षा और आवास जैसे क्षेत्रों में कर्ज बढ़ाने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बैंकों व सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जम्मू की ओर से लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम), जिला विकास प्रबंधक (डीडीएम) और अग्रणी जिला अधिकारी (एलडीओ) के लिए आयोजित कार्यशाला में यह रोडमैप तैयार किया गया।
इसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विभिन्न जिलों के अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला में जिला ऋण योजना (पीएलपी) को प्रभावी तरीके से तैयार करने और उसे वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) में बदलने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके साथ ही यूटीएलबीसी की भूमिका और सरकारी योजनाओं के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कर्ज पहुंचाने के उपायों पर भी मंथन हुआ। अधिकारियों ने बताया कि छोटे किसानों और उद्यमियों को राहत देने के लिए बिना गारंटी के कृषि ऋण की सीमा बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है।
वहीं एमएसएमई क्षेत्र में यह सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की जा रही है, जो एक अप्रैल, 2026 से लागू होगी। इसका उद्देश्य अधिक लोगों को आसान शर्तों पर कर्ज उपलब्ध कराना है। कार्यशाला में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार और आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक चंद्रशेखर आजाद भी मौजूद रहे।