रोशनी और खुशबू से जगमग करते दीये और मोमबत्तियों के बीच नकली फूलों की सजावट कुछ तुक नहीं बनती है। खुशबूदार, हाथ लगओं तो नरम एहसास, कोमलता ऐसी कि जोर से हाथ लगे तो पंखुड़ियां बिखर जाएं, ऐसे होते हैं असली फूल। उनसे दीवाली पर जब घर सजता है तो पूरा घर वाटिका सा दिखता है। बाजार में ऐसे नकली फूल हैं जो बिल्कुल असली लगते हैं लेकिन असली तो असली ही होते हैं। असली फूलों के दाम ऐसे कि आसमान छू रहे हों।
मन भावन और पूजा में विशेष स्थान रखने वाले गेंदे के फूल 130 रुपये किलो के हिसाब से मिलना शुरू हो गये हैं। दीवाली को सिर्फ दो दिन शेष रहे हैं। दीपावली वाले दिन वैसे ही इनके दामों में 20 से 30 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो जाती है। मैटाडोरें, बसें, दुकानों को भी तो फूलों से सजाने की परंपरा है। मांग बढ़ने के साथ दाम भी बढ़ जाते हैं। वहीं मां लक्ष्मी का प्रिय फूल लाल गुलाब तो महंगाई के कारण और भी लाल हो जाता है।
पूरा खिला हुआ गुलाब तो महंगा हो ही गया है, साथ ही टूटी हुई पंखुड़ियां भी महंगी हो गई हैं। विष्णु प्रिय माता लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो कमल नयन विष्णु को सबसे पहले प्रसन्न करना है। ऐसे में कमल का फूल पूजा में शामिल करना भी एक परंपरा बन गई है। मन्दिरों के शहर में कमल न खिले ऐसा कैसे हो सकता है लेकिन कमल महंगा है। कारणवश पूजा में आम आदमी की पहुंच से से बाहर हो जाता है।
कमल का एक छोटा सा अधखिला फूल पंद्रह से बीस रुपये के बीच में मिल रहा है। दीवाली वाले दिन इसके दामों में भी थोड़ी सी वृद्धि हो जाती है। वैसे भी कमल का फूल हर जगह नहीं मिलता है। ज्यादातर कमल के फूल रनवीरेश्वर मन्दिर और रघुनाथ मन्दिर के बाहर फूल बेचने वालों के पास मिलते हैं। असली फूल कहीं भी मिले, फूल वही जो घर को महकाएं। माता लक्ष्मी के स्वागत में कहीं कोई कमी न रहे इसके लिये यह भी आवश्यक है कि सजावट में कोई नकलीपन न हो।