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कश्मीर विलो का व्यवसाय चौपट, सड़ गए क्रिकेट बैट

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भारत रतन सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी में निखार लाने वाला कश्मीर विलो का वजूद संकट झेल रहा है। सैलाब ने क्रिकेट बैट के कारोबार की कमर तोड़ दी है। पापुलर और विलो के पेड़ की लकड़ियों से बैट बनाने के धंधे में लगे लगभग बीस हजार लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है।
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बैट की फैक्ट्रियों में बनाकर रखे गए लाखों बैट पानी में बह गए और लकड़ियां पानी में सड़ गई हैं। फिनिश़िग के बाद तैयार हुए बैट दुकानों और गोदामों में सड़ गए। बैट का कारोबार फिलहाल पूरी तरह ठप हो गया है।

कश्मीर में आने वाले पर्यटक और माता वैष्णो देवी के दर्शन को आने वाले अधिकांश यात्री अपने साथ कश्मीर विलो से बने बैट भी ले जाते रहे हैं। इसके अलावा ट्रकों से बैट देश के हर कोने में भेजा जाता रहा है। सैलाब के बाद तमाम फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं और दुकानों में ताला लटक गया है।
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'बाहर से फिलहाल आर्डर मिलना पूरी तरह बंद है'

कश्मीर विलो की एक फैक्ट्री के मालिक अल्ताफ कहते हैं कि उनकी लगभग बीस लाख की पूंजी डूब गई। मोहम्मद यूसुफ बट का भी यही दर्द है। वह कहते हैं कि सारा माल खराब हो गया। फैक्ट्री में सिर्फ बैट तैयार होता है। इसका हैंडल भी हम बनाते हैं। बाद में इसकी फिनिशिंग दूसरी फैक्ट्री में होती है।

निर्माण से लेकर फिनिशिंग तक की सभी फैक्ट्रियां सैलाब में सात दिनों तक डूबी रहीं। चोरसू के फैक्ट्री मालिक अब्दुल हमीद खां ने कहा कि अधिकांश फैक्ट्रियों का इंश्योरेंस नहीं है। नुकसान का जायजा लेने कोई सरकारी टीम नहीं आई है। राहत पैकेज की चर्चा तक नहीं है। सैलाब ने सब कुछ चौपट कर दिया।

जो बैट पहले बनाए गए थे, वे किसी काम के नहीं रहे। नए सिरे से कारोबार खड़ा करने के लिए मोटी पूंजी चाहिए। मार्केट में हमारे बैट को अब शक की निगाह से देखा जाएगा। खरीदार सड़ी लकड़ी के बैट होने का संदेह जता सकते हैं। बाहर से फिलहाल आर्डर मिलना पूरी तरह बंद है।
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सचिन का पहला बैट भी यहीं का था

सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि उनके हाथ उनकी बहन द्वारा दिया गया पहला बैट जो आया, वह कश्मीर विलो ही था। कश्मीर विलो की सप्लाई पूरे देश के हर कोने में होती रही है।

अब वह बाजार नहीं सजता
पंपोर के पास संगम से लेकर चोरसू तक कश्मीर विलो की पचास से अधिक फैक्ट्रियां हैं। छोटी-बड़ी लगभग सौ दुकानें कतारबद्ध दिखती हैं। सड़क के किनारे हजारों की संख्या में क्रिकेट बैट करीने से सजाकर रखे जाते रहे हैं।

सैलाब के बाद बैट का यह सजा हुआ बाजार अब नजर नहीं आता। सैलाब बैट के जिन सजे ढेर को अपने साथ नहीं ले गया, उसे सड़ाकर बेकार कर दिया है।
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