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कश्मीर के पुनर्निर्माण में विदेशी संस्थाएं भी बटाएंगी हाथ

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बाढ़ की तबाही के बाद कश्मीर के पुनर्निर्माण में विदेशी वित्तीय संस्थानों की भूमिका अहम रहेगी। इस बाबत केंद्र और रियासत सरकार में सहमति बन गई है।
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विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद से ध्वस्त इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने को कोशिश होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के प्रस्ताव पर रियासत सरकार की सहमति के बाद वर्ल्ड बैंक और एडीबी की उच्चस्तरीय टीम मंगलवार को रियासत के दौरे पर आ रही है।

ध्वस्त इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से खड़ा करने कवायद

विदेशी वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की रियासत के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक के बाद सहायता की कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। विदेशी टीम बाढ़ से तबाही का जायजा भी लेगी।

वित्त विभाग के सूत्रों के मुताबिक विश्व बैंक और एडीबी के अधिकारी पहले रियासत के अफसरों के साथ मदद के प्रारूप पर प्रारंभिक चर्चा करेंगे। रियासत सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार की है।

विश्व बैंक और एडीबी के अधिकारियों को यह रिपोर्ट सौंपी जाएगी। बैठक के बाद विदेशी वित्तीय संस्थानों की ओर से विशेषज्ञों की टीम भेजी जा सकती हैं।
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पूर्व की आपदा में भी सहायता करती हैं कंपनियां

विशेषज्ञों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करेंगी। गौरतलब है कि उत्तराखंड, तमिलनाडु और बिहार में प्राकृतिक आपदा के बाद इन विदेशी एजेंसियों ने सहायता की थी।

अब उसी तर्ज पर रियासत में भी पुनर्वास पैकेज देने की कोशिश हो रही है। उत्तराखंड हादसे के बाद विश्व बैंक ने लगभग 400 मिलियन डालर के सहायता पैकेज दिया था।

विश्व बैंक और एडीबी की ओर से जम्मू कश्मीर को सहायता ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। चूंकि जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है इसलिए कर्ज का अधिक बोझ केंद्र सरकार को ही उठाना पड़ेगा।

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