जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने छत्तीसिंहपोरा नरसंहार मामले में जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
जस्टिस याकूब मीर और जस्टिस एमएच अटार की डिवीजन बेंच की ओर से ओर से अभियोजन पक्ष को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश जारी किए हैं।
हाईकोर्ट में मेहजूर निवासी सरदार अवतार सिंह सोढ़ी द्वारा 20 मार्च 2000 में लश्कर आतंकियों द्वारा छत्तीसिंहपोरा में 35 सिखों की हत्या किए जाने के मामले की जांच को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगी रिपोर्ट
2010 में 2008 के मुंबई धमाकों के मामले में गिरफ्तार किए गए डेविड हेडली ने पूछताछ में एनआईए के समक्ष खुलासा किया था कि अमेरिकी राष्ट्रपित बिल क्लिंटन के दौरे से ठीक एक दिन पहले लश्कर की ओर से छत्तीसिंहपोरा में नरसंहार को अंजाम दिया गया था।
पूछताछ में आतंकी ने लश्कर आतंकी मुज्जमिल के नरसंहार में शामिल होने की बात कही थी। उसने जांच एजेंसी को बताया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे से पहले जम्मू-कश्मीर में तनाव फैलाने के लिए वारदात को अंजाम दिया गया था।
जनहित याचिका में याचिकाकर्ता द्वारा इस मामले की जांच के अलावा रियासत में सिखों के लिए सभी सरकारी विभागों एवं संस्थाओं में आरक्षण लागू करने की भी मांग की गई है।
याचिका में की गई जांच की मांग
इसके साथ ही सिख समुदाय के लिए अलग से बोर्ड गठित करने और कश्मीर विश्वविद्यालय में पंजाबी भाषा विभाग स्थापित करने की भी मांग की गई है।
साथ ही अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अंतर्गत देश के अन्य हिस्सों में मिलने वाली रियायतें सिखों के लिए भी लागू करने की मांग की गई है।