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कश्मीर में फिर बाढ़ का कहर, 10 की मौत

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चरार ए शरीफ में 80 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। यहां से 99 परिवारों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। बड़गाम जिले में भी नदी नाले उफान पर होने से कई रास्तों पर आवागमन ठप हो गया है। पुंछ नदी में बाढ़ से कलाई इलाके में 20-25 नागरिक फंस गए थे, जिन्हें प्रशासन ने सुरक्षित निकाला।
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मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा बाढ़ नियंत्रण मंत्री सुख नंदन भी हालत का जायजा लेने पहुंच गए हैं। मंत्री सैय्यद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी, इमरान रजा अंसारी, मोहम्मद अशरफ मीर तथा आशिया नक्कास का दल लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

इसके साथ ही मंडलायुक्त तथा आईजी ने भी विभिन्न इलाकों का दौरा कर भारी बारिश से उत्पन्न स्थिति की जानकारी हासिल की। उधर, जम्मू में भारी बारिश हुई और ओले पड़े। इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा। अखनूर क्षेत्र के खौड़ के लाम में बिजली गिरने से खेत में काम कर रही एक महिला की मौत हो गई। कठुआ, उधमपुर में भी जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।
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पुंछ जिले में 20 से 25 परिवार फंस गए हैं

श्रीनगर से 20 किलोमीटर दूर बडगाम में बांध टूटने से निचले इलाकों में पानी घुस गया है। बडगाम के लादेन गांव में एक मकान ढह गया जबक‌ि चरार-ए-शरीफ में चार घर जमीन में धंस गए हैं जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई है और 13 लोग लापता हैं।

कई जगहो पर जो घर धंस गए हैं उनमें से लोगों को न‌िकाले जाने का प्रयास क‌िया जा रहा है। अभी तक मलवे में से क‌ोई भी शव नहीं न‌िकाला जा सका है।

सरकारी अधि‍कारियों ने बताया कि पुलिस ने सेना और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया है। जम्मू में सुरान नदी ने बारिश के बाद अपना रास्ता बदल लिया है और उसके बहाव में पुंछ जिले में 20 से 25 परिवार फंस गए हैं। रेस्क्यू टीमें इन लोगों को बचाने में जुट गई हैं।

पुलवामा के कई इलाकों में पानी भर गया है। नदियों में पानी का स्तर बढ़ने से कई गांवों से संपर्क टूट गया है। सरकार ने भारी बारिश की वजह से कश्मीर डिवीजन के जिलों में भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

24 घंटे तक होती रहेगी भारी बारिश

पिछले दो दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते श्रीनगर में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। डल झील तथा झेलम नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।  रात साढ़ 11 बजे संगम के पास झेलम नदी का जलस्तर 19.70 फीट मापा गया जोकि खतरे के निशान (18 फीट) से करीब दो फीट अधिक है।

राममुंशी बाग इलाके में भी जलस्तर 16.50 फीट मापा गया। यहां खतरे का निशाना 16 फीट पर है। जेवीसी अस्पताल बेमिना में ग्राउंड फ्लोर में पानी भर जाने से मरीजों को देर रात सौरा अस्पताल शिफ्ट किया गया है। बाढ़ के चलते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए सरकार की ओर से ईडीआई पांपोर और सनतनगर बैंक्विट हाल में रेस्क्यू कैंप लगाए गए हैं।

सितंबर जैसे हालात को याद कर झेलम किनारे रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों की ओर रुख करने लगे हैं। भारी बारिश में कुंजर पुल का एक हिस्सा बह जाने से श्रीनगर-गुलमर्ग हाईवे पर आवागमन ठप हो गया है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर रविवार को भी यातायात ठप रहा। झेलम में एक खाली हाउस बोट डूब गई।

खराब मौसम को देखते हुए श्रीनगर में कक्षा आठ तक के स्कूल 30 एवं 31 मार्च को बंद कर दिए गए हैं। कश्मीर विश्वविद्यालय की सोमवार की परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गईं हैं। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में राज्य के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश होगी। पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है।

सचिवालय के डूबने का खतरा

रविवार को नार्थ और साउथ कश्मीर के अलग अलग इलाकों से सेना और पुलिस द्वारा बाढ़ में फंसे 237 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। जम्मू संभाग के पुंछ जिले की हवेली तहसील में 60 लोग बाढ़ में फंस गए। इनमें से 10 को निकाल लिया गया है। कटड़ा में सांझीछत से भवन तक के लिए चॉपर सुबह ही उड़ान भर सका।

इसके बाद दिनभर चॉपर सेवा प्रभावित रही। भद्रवाह और सियोजधार के अलावा गुलमर्ग में रविवार को बर्फबारी हुई। गुलमर्ग में सात इंच बर्फबारी दर्ज की गई। श्रीनगर में राजबाग, लाल चौक सहित अन्य कई इलाकों में चार से पांच फीट तक पानी है। डल झील का पानी सड़क तक पहुंच गया है।

झेलम नदी का जलस्तर बढ़ने से नईना से लेथपोरा इलाके तक के 100 से अधिक परिवारों ने सुरक्षित स्थान पर ठिकाना बना लिया है। श्रीनगर जिला मुख्यालय का अन्य इलाकों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। सचिवालय से आधा किलोमीटर दूर हरि सिंह मार्ग पर भी भारी जल जमाव है। सितंबर महीने में सचिवालय डूब गया था, जिससे कई जरूरी दस्तावेज खराब हो गए थे।

घाटी में हिमस्खलन की चेतावनी

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में कई इलाकों में हिमस्खलन की चेतावनी दी है। कुलगाम, पुलवामा, बारामुला, कुपवाड़ा, बांडीपोरा, गांदरबल और कारगिल जिले में हिमस्खलन को देखते हुए लोगों को सतर्क किया गया है। डिविजनल कमिश्नर कश्मीर ने बताया कि सभी डिप्टी डिविजनल कमिश्नर को सतर्क कर दिया गया है। लोगों को एहतियात बरतने को कहा गया है।

कंट्रोल रूम खुला
जिला स्तर पर लोगों की सहायता के लिए पुलिस नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। पुलिस ने श्रीनगर में तीन सहायता नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं। नियंत्रण कक्ष का फोन नंबर 0194-2452138, 2474040, 2450946 है। व्हाट्स एप पर 9858222333 पर भी जानकारी दी जा सकती है।

हवाई सेवा जारी पर सड़क मार्ग बंद
भारी बारिश का हवाई सेवा पर असर नहीं पड़ा है। सभी विमान निर्धारित समय से पहुंचे। हालांकि, जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग मरम्मत कार्य के चलते बंद रहने से पिछले दो दिनों से सैकड़ों यात्री और वाहन श्रीनगर तथा जम्मू में फंसे हुए हैं। उधमपुर में वाहनों की कतार लगी हुई है। दोपहर में कुछ देर के लिए राजमार्ग को खोला गया था।

घाटी में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं: राज्यमंत्री

रविवार को मीडिया के साथ बातचीत करते हुए बाढ़ नियंत्रण राज्यमंत्री अब्दुल मजीद पाडर ने बताया कि घाटी में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।  वह लोगों से कहना चाहते हैं कि परेशान न हाें। उन्होंने कहा कि भारी बारिश और बारिश से होने वाली गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है।

उन्होंने बताया कि संगम, राम मुंशीबाग और आशम इलाकों की स्थिति अभी तक नियंत्रण में है। राज्यमंत्री ने जानकारी दी कि स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए श्रीनगर के पीसीआर में खासतौर पर स्पेशल कंट्रोल रूम स्थापित किया है। वह लोगों से अपील करते हैं कि कहीं पर भी अगर गंभीर स्थिति बनती है तो वह 2452138 या 2474040 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

हार्टीकल्चर पर भी असर
आम, अमरूद, नाशपाति पर इस समय फ्लावरिंग हो रही थी। आंधी और ओलों से फ्लावरिंग झड़कर नीचे गिर गई। सब्जियों की भी बिजाई कर दी गई थी। जो पानी की वजह से खराब हो गई। दलहन की फसल भी बिजाई गई थी। इसमें चने की दाल, मां की दाल और राजमा शामिल है।
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बारिश की भेंट चढ़ी रबी की फसलें

किसानों पर एक बार फिर बारिश की मार पड़ी है। बची फसल भी जोरदार बारिश, आंधी और ओलों की भेंट चढ़ गई। बागवानी और रबी की फसलों पर ज्यादा असर पड़ा है। किसानों के लिए सबसे चिंता की बात अब तक नुकसान का आकलन न करना है। कृषि विभाग ने राजस्व विभाग के साथ मिलकर नुकसान का आकलन करना था।

पहले भी बारिश से 50 फीसदी फसलें नष्ट हो गई थीं और अब फिर बारिश से बची फसलें नष्ट हो चुकी हैं। कृषि मंत्री गुलाम नबी लोन ने करीब दस दिन पहले बारिश होने पर नुकसान के आकलन का निर्देश दिया था, लेकिन अभी तक राजस्व विभाग की ओर से कोई आकलन नहीं किया गया।

किसानों के लिए बजट में भी कुछ नहीं मिला था, जिससे भी किसानों में रोष है। शेर-ए-कश्मीर कृषि एवं तकनीकी विज्ञान विश्वविद्यालय के रिसर्च विभाग के निदेशक जेपी शर्मा का कहना है कि बारिश का किसानों का बहुत नुकसान हुआ है। पिछले दिनों हुई बारिश की वजह से गेहूं की 50 फीसदी फसल नष्ट हो गई।

इसके बाद जो थोड़ी बहुत फसल बची थी, उसमें दानें नहीं बन पाने से किसानों ने फसलें चारे के रूप में मवेशियों को खिलाईं। अब जो फसल बची थी, वह इस बारिश ने चौपट कर डाली।
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