डाक्टर साहब... पांच दिनों से नींद नहीं आ रही। घर पर सोना तो दूर बैठने तक के लिए जगह नहीं बची। रात को सोने के लिए परिवार सहित छत पर जाते तो हैं लेकिन नींद नहीं आती। कोई ऐसी दवा दें कि नींद आ जाए बस। यह दर्द फ्लाएं मंडाल क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव सूड़ेचक के एक नहीं, दो नहीं बल्कि हर महिला और पुरुष का है।
पांच दिन पूर्व शनिवार छह सितंबर को तवी में आई बाढ़ ने खुशहाल ग्रामीणों की पल भर में दुनिया ही बदलकर रख दी। बुधवार को गांव में सेना के पहुंचने और चिकित्सा शिविर लगाने के बाद ग्रामीणों ने अपने दर्द बयां किए।
पेशे से श्रमिक रतन लाल कहते हैं कि बाढ़ ने उसका घर तबाह कर दिया। सारा सामान बर्बाद हो गया। कमरों में अभी तक कीचड़ जमा है। पांच दिनों ने नींद नहीं आई है। सोने की कोशिश जब भी करते हैं तो बाढ़ की खौफनाक तस्वीरें आंखों के सामने आ जाती है। पांच दिन बाद आज सेना के डाक्टर गांव में पहुंचे तो उन्होंने अपना दर्द साझा किया।
अब सुख चैन सब छिन चुका है...
इस गांव के रवि कुमार, तृप्ता देवी की भी यही दर्द है। उनका कहना है कि बाढ़ ऐसी थी कि सब कुछ तबाह कर दे। रात को सोए हुए हालत में आई बाढ़ ने सब कुछ तबाह करके रख दिया। अब सुख चैन सब छिन चुका है। रात को सोने के लिए गांव में लगभग सभी घरों में जगह तक नहीं बची। खाना पकाने के लिए कुछ नहीं बचा।
सरकारी मदद के तौर पर केवल दस किलो आटा मिला है और कुछ नहीं। सूखे आटे का क्या करें। शुक्र है शिव मंदिर मंडाल के स्वामी हरि राम दास जी का यहां से प्रतिदिन पका हुआ खाना गांव में पहुंच रहा है और लोग भूखे प्यासे तड़पने से बच रहे हैं।
राहत शिविर लगाने तक को नहीं मिली पक्की इमारत
तवी में आई भयंकर बाढ़ में बहे फ्लाएं मंडाल पुल के बाद कटे करीब साठ गांवों का सड़क संपर्क सेना की ओर से राहत सेतु का निर्माण कर बहाल होने के बाद बुधवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में मची तबाही का मंजर देख सभी सिहर उठे।
बाढ़ से मची तबाही के बाद से गांव में राहत शिविर तक लगाने को पक्की इमारत तक नहीं बची। आलम तो यह है कि पांच दिनों के बाद सेना ने बाढ़ प्रभावित सूड़ेचक स्कूल के परिसर में राहत शिविर लगाया।
स्कूल के कमरों में बाढ़ से कीचड़ जमा होने की वजह से परिसर में ही बीस टेंट लगाए गए। पांच दिनों बाद सेना की ओर से टेंट लगाए जाने के बाद ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है।
जम्मू श्रीनगर नेशनल हाइवे बंद हो जाने के बाद वह फंस गए। दो दिन पहले किसी तरह गांव में पहुंचे तो देखा कि पूरा घर, सामान खराब हो चुका है दुधारू पशु बह गए।
परिवार के सदस्यों के पास वही कपड़े ही बचे हैं जो उन्होंने पांच दिन पहले पहने थे। सरकारी मदद के नाम पर दस किलो आटा ही परिवार को मिला है।