पन बिजली और सौर ऊर्जा के बाद अब पवन ऊर्जा के दोहन की कवायद तेज होने जा रही है। रियासी जिले में रियासत की पहली पवन चक्की चलेगी। हजारों मेगावाट क्षमता की निशानदेही कर चुकी सरकार छह मेगावाट के साथ शुरुआत करेगी, जिसके बाद रियासी जिले की तर्ज पर राज्य की अन्य साइटों पर फोकस बढ़ेगा।
रियासत में अपनी तरह के इस पहले प्रोजेक्ट को नेशनल इंस्टीट्यूट आफ विंड इनर्जी ने हरी झंडी दे दी है। अब डीपीआर को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सब कुछ ठीक रहता है तो जल्द ही हवा को ऊर्जा में परिवर्तित करने वाला पहला प्रोजेक्ट मूर्तरूप हासिल कर सकेगा। जम्मू कश्मीर इनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (जेकेडा) इस परियोजना पर पिछले चार वर्ष से कसरत कर रही थी।
राज्य भर में बीस अलग-अलग स्थानाें का अध्ययन किया गया, जिसमें रियासी जिले की सलाल बिजली परियोजना क्षेत्र में आने वाले गांव बिड्डा के नतीजे सबसे बेहतर पाए गए। पवन चक्की ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला फनलिंग इफेक्ट बिड्डा गांव में 3.6 मीटर प्रति सेकेंड रहा है, बिजली उत्पादन के लिहाज से यह बेहद उत्साहित करने वाला है।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से पवन चक्की ऊर्जा का 9 मेगावाट का प्रोजेक्ट मंजूर है, लेकिन जेकेडा 36 करोड़ की लागत से 6 मेगावाट का प्रोजेक्ट शुरू करेगा, जिसमें प्रति मेगावाट के कुल खर्च 6 करोड़ में केंद्र से 1.5 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी।
5685 मेगावाट है क्षमता
जम्मू कश्मीर में पवन ऊर्जा की संभावना को लेकर किए गए सर्वे में कुल क्षमता 5685 मेगावाट आंकी गई है। वर्तमान में 20 साइटों पर अध्ययन चल रहा है। बांध स्थल होने की वजह से रियासी के बिड्डा गांव में हवाओं की रफ्तार तेज रहती है। ऐसे और भी इलाकों की तलाश की जा रही है।