आरएस पुरा और अरनियां क्षेत्र में पड़ने वाली भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भले ही पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर रहा है लेकिन दहशत के बावजूद इस इलाके के लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
गांवों का दौरा करने पर पता चला कि कुछ क्षेत्रों के लोगों ने अपने नन्हे बच्चों को दूरदराज इलाकों में रहने वाले रिश्तेदारों के घर में छोड़ दिया है लेकिन वे खुद घरों में डटे हुए हैं।
उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस त्रासदी को झेलते आ रहे हैं, इसलिए अब घर छोड़ने का सवाल ही नहीं है।
गोलीबारी अब उनकी जिंदगी का एक हिस्सा
आरएस पुरा के अब्दुलियां, सुचेतगढ़, एएमके पोस्ट, हंसू चक, कोरोताना जैसे ग्रामीण इलाके पड़ोसी देश की नापाक हरकतों का सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं।
इसके अलावा अरनियां के काकु दे कोठे के आसपास के क्षेत्र में भी लगातार गोलाबारी हो रही है। गोलीबारी होना उनकी जिंदगी की एक हिस्सा सा बना चुकी है।
अरनियां इलाके के ग्रामीणों का कहना है कि दिन हो या रात, लगातार गोलाबारी की आवाज उनके कानों में गूंजती रहती है। पहले तो बच्चे डर जाते थे लेकिन अब उन्हें भी आदत पड़ गई है।
जिंदगी और मौत के बीच झूलती जिंदगी
बच्चों को सुरक्षा की दृष्टि से रिश्तेदारों के पास भेज दिया गया है। ग्रामीणों के अनुसार खेतों में काम करने भी जा रहे हैं लेकिन डर रहता है कि कब गोलाबारी हो जाए।
पिछले कुछ दिनों से ऐसी ही परिस्थितियों से जूझना पड़ रहा है खेतों में गए बगैर जीवन भी नहीं चलता। शांति से गुजरा हर दिन अच्छा लगता है।
लोगों का कहना है कि सरकार सीजफायर के उल्लंघन को गंभीरता से ले और प्रधानमंत्री मोदी पर पाक प्रधानमंत्री से बात करने का दबाव बनाए।