शहर की गलियों में शुक्रवार को बिखरे पटाखों के अवशेष, फुलझड़ियों की लोहे के तार इस बात के गवाह बने कि वीरवार की रात शहर ने जमकर दिवाई मनाई है। वहीं पसरा कचरा इस बात का प्रमाण बना कि नगर निगम ने सफाई को लेकर कोई विशेष प्रबंध नहीं किए। वैसी ही व्यवस्था दिखी जैसी आम दिनों में साफ-सफाई की रहती है।
नगर निगम पहले ही स्वीकार चुका था कि उसने दिवाली की सफाई को लेकर विशेष प्रबंध नहीं किए हैं। इस बाबत कोई विशेष टीमें भी गठित नहीं की गई है। रूटीन में जो सफाई कर्मी काम करते हैं वही काम करेंगे। बेशक उन्होंने काम किया भी, लेकिन दिवाली का कचरा अन्य दिनों के मुकाबले अधिक था।
मुख्य सड़कें और बाजार तो साफ किए गए, लेकिन गली और मोहल्लों की हालत में कोई ज्यादा फर्क दिखाई नहीं दिया। पुराने शहर में सफाई कर्मचारियों ने सफाई को लेकर खूब दमखम दिखाया, लेकिन न्यू प्लाट की गलियां, जवाहर नगर, रोड़े दी छप्पड़ी, लक्ष्मी नगर की अंदर की गलियों समेत अन्य मोहल्लों की सफाई व्यवस्था ने निगम के कार्यों की पोल खोलने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।
अखिल भारतीय सफाई कर्मचारी संगठन के पूर्व प्रधान देवानंद गिल ने कहा कि दिवाली से पहले और बाद में कचरा बढ़ जाता है। इसके लिए नगर निगम को ही पर्याप्त प्रबंध करने चाहिए।