जंगल का सोना कहे जाने वाले चीड़ के पेड़ इस समय आग भेंट चढ़ रहे हैं। जाड़ा नजदीक आने के साथ चीड़ के जंगलों में खूब पत्तियां गिरी होती हैं, जिसमें आग तेजी से पकड़ती है। इसके साथ ही एक बार यदि चीड़ के जंगल में आग लग गई तो वह बहुत तेजी से पहुंचती है, क्योंकि चीड़ के पेड़ में पाया जाने वाला रेजिन आग लगने पर दावानल बन जाता है, जिससे बुझाना बहुत मुश्किल होता है।
शुक्रवार रात को जब जिले के गलगिंदर इलाके में आग लगी तो यही हुआ। जल्दी ही यह आग तेजी से फैलने लगी, जिसने सैकड़ों पेड़ों को जलाकर राख कर दिया। इससे लाखों रुपये की वन संपदा जलकर राख हो गई है।जिला डोडा के अंतर्गरत पड़ने वाले गलगिंदर के जंगलों में कंपार्टमेंट 64 जिला मुख्यालय से मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर है। यहां शुक्रवार की रात करीब 10:30 बजे भीषण आग लग गई।
आग में चीड़ के कई पेड़ जलकर राख हो गए, जबकि बड़ी संख्या में पेड़ झुलस गए हैं। आने वाले समय में ऐसे पेड़ सूख सकते हैं। मौके पर मौजूद रेंज आफिसर केलाड आफताब अहमद ने बताया कि रात देर रात जैसे ही हमें जंगल में आग लगने की सूचना मिली, हमारी पूरी टीम रात में ही मौके पर पहुंच गई और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया गया।
तकरीबन 16 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हमने 90 प्रतिशत आग पर काबू पा लिया है। यहां पर सड़क नहीं होने से दमकल वाहन यहां नहीं आ सकता है। इसलिए वन विभाग के फारेस्ट गार्डों और कर्मचारियों ने अपने दम पर आग बुझाने का प्रयास किया। इससे आग बुझाने में समय ज्यादा जरूर लगा, लेकिन हमेशा आग पर काफी हद तक काबू पा लिया है।