प्रदेश की समृद्ध कला और संस्कृति को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में फिल्म महोत्सव के साथ तीन सूफी महोत्सव आयोजित होंगे। रंगमंच को दिशा देने के लिए श्रीनगर में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) का केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। यह बात सोमवार को उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार संस्कृति और संबद्ध विभागों के कामकाज की समीक्षा बैठक के दौरान कही।
उप-राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास सांस्कृतिक विरासत की संपदा है। इसे दुनिया को दिखाने की जरूरत है। कहा कि यह शंकराचार्य, नुंद ऋषि, हब्बा खातून, लल देद, देवी रूपा भवानी जैसे सूफियों और संतों की भूमि है। उनके जीवन इतिहास के साथ युवा पीढ़ी को जोड़ा जाएगा। ऐसे शख्सियतों के जन्मस्थलों पर विरासत स्थल विकसित करने की आवश्यकता है। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मंदिरों, स्मारकों और विरासत स्थलों के प्रचार और विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उप-राज्यपाल ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन और पर्यटन और सांस्कृतिक प्रचार के निर्देश दिए। शिवखोड़ी और रियासी में बाबा बंदा सिंह बहादुर स्थल के विकास पर जोर दिया। उन्होंने संस्कृति विभाग को वार्षिक कैलेंडर तैयार करने को कहा।
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