केंद्रीय सरकार के प्रतिष्ठित स्मार्ट सिटी मिशन में जम्मू, श्रीनगर शहरों में कांटे का मुकाबला होना तय है। रियासती सरकार चाहे इस मसले पर खुलकर बात करने से कतरा रही है, लेकिन दोनों में से अंकों के बाजीगर शहर को ही स्मार्ट सिटी मिशन में जगह मिल पाएगी।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासती सरकार के आग्रह पर केंद्रीय सरकार के आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने जम्मू, श्रीनगर शहरों को प्रतियोगिता में फिर से शामिल होने का मौका देने पर सहमति तो जताई है, लेकिन मिशन के तय तरीकाकार में जरूरी अंक जुटाने वाले शहरों को ही कवर किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह चाहे दावा कर रहे हैं कि केंद्रीय शहरी आवास मंत्री वैंकयानायडू ने उन्हें जम्मू, श्रीनगर शहरों को प्रतिष्ठित स्मार्ट सिटी मिशन में जल्द शामिल करने का आश्वासन दिया है, लेकिन रियासत की शीतकालीन राजधानी जम्मू हो या ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर, केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी मिशन में इन शहरों को शामिल होने के लिए जरूरी अंक जुटाने ही होंगे।
मंत्रालय अंकों के हिसाब से स्मार्ट सिटी का चयन
स्मार्ट सिटी
- फोटो : डेमो फोटो
राज्य सरकारें स्मार्ट सिटी के प्रस्तावित शहरों का प्रस्ताव केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय को भेजती है। मंत्रालय अंकों के हिसाब से स्मार्ट सिटी का चयन करता है। मसलन शहर में पिछले तीन साल में ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में हुए कार्य, शहर की परिवहन स्थिति, जल उपलब्धता, शहर में सुरक्षा और सेफ्टी की स्थिति, ऊर्जा की उपलब्धता और आवासों की स्थिति शामिल है।
खासतौर से नगर निगम की ओर से बिल्डिंग प्लान और संपत्ति टैक्स वसूलने पर हुए कार्य पर भी अंक दिए जाते हैं। फिलहाल जम्मू हो या श्रीनगर शहर, इन दोनों में काफी कुछ किया जाना बाकी है। उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह के अनुसार पिछली बार जम्मू, श्रीनगर दोनों शहरों को बराबर के अंक 46.5 मिले। यही कारण है कि अब फिर से दोनों शहरों को प्रतियोगिता से गुजरना है।
स्मार्ट सिटी जम्मू के लिए इन बिंदुओं पर काम करना जरूरी
- ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना को अमलीजामा पहनाना
- शहरवासियों की सुरक्षा और सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम
- बिजली, पानी की सप्लाई में सुधार
- परिवहन प्रबंधन की स्थिति में सुधार लाना
- नगर निगम की ओर से बिल्डिंग प्लान और संपत्ति टैक्स पर काम करना
- बिजली और बिजली की बर्बादी को रोकना