दिनभर नरवाल की रोहिंग्या बस्ती में चले घटनाक्रम के बाद रात होते-होते तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जहां दिन में कार्रवाई और टूटते ढांचों की आवाज सुनाई दे रही थी, वहीं रात में बस्ती के लोगों के चेहरों पर डर साफ नजर आया। इस बार प्रशासन या पुलिस ने दुकानें और झुग्गियां नहीं तोड़ीं, बल्कि खुद रोहिंग्याओं ने अपने अस्थायी ढांचे हटा रहे थे। रात तक बस्ती में टूटे टीन, लकड़ियां और सामान सड़कों के किनारे बिखरा पड़ा था।रात करीब आठ बजे मौके का माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया।
अंधेरे में कई रोहिंग्या अपने टूटे ढांचों से सामान निकालकर सुरक्षित जगह ले जाते दिखे। कहीं टीन की चादरें पड़ी थीं तो कहीं लकड़ियों का ढेर लगा था। दिनभर जिन जगहों पर दुकानें और झुग्गियां थीं, वहां मलबा नजर आ रहा था। रोहिंग्या सड़क किनारे समूह बनाकर खड़े थे और पूरे घटनाक्रम को लेकर आपस में चर्चा कर रहे थे।