नेकां अध्यक्ष व सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तरह सहिष्णु होने की नसीहत दी है। भाजपा ने हमेशा विभाजन की राजनीति की है। जवाहर लाल नेहरू ने जब लाल किले पर पहली बार तिरंगा फहराया था, तब यह नहीं सोचा था कि देश को विभाजित करने वाली ताकतें भी आएंगी। डॉ. फारूक वीरवार को शेर-ए-कश्मीर भवन जम्मू में डॉ. बीआर अंबेडकर की पुण्यतिथि कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्य ने इंडिया, पाकिस्तान बनाकर देश को तोड़ दिया और सत्ताधारी दल भी उसी नीति पर काम कर रहा है। भाजपा राम के नाम पर वोट मांग रही है। लेकिन ये उन्हीं की पुस्तिकाओं में लिखा है कि भगवान राम पूरी दुनिया के भगवान हैं।
प्रधानमंत्री को सहिष्णुता अपनानी चाहिए। वे सभी के प्रधानमंत्री हैं। हमें चीन और पाकिस्तान से युद्ध की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें देश के भीतर की विभाजित करने वाली ताकतों को खत्म करना चाहिए।
उन्होंने राज्य में शीघ्र विधानसभा चुनाव करवाने की वकालत की। इससे राज्यवासी अपनी सरकार चुनें, ना कि दिल्ली से। राज्य में शांति और विकास के लिए स्थिर सरकार की जरूरत है। डॉ. फारूक ने यह भी कहा कि गठबंधन में कई चुनौतियां रहती हैं।
नेकां ने अपने कार्यकाल में युवाओं को रोजगार देने के साथ जम्मू-कश्मीर की बुनियादी समस्याओं का समाधान किया। राज्यपाल के विधानसभा भंग करने के साथ भाजपा का सस्पेंस खत्म हो गया। नई दिल्ली की सरकार विभाजन की रणनीति पर काम कर रही है।