बारिश, बाढ़ और पाकिस्तानी गोलाबारी की मार सहने के बाद एक बार फिर मौसम के बिगड़े मिजाज को देखकर किसानों के चेहरे मुरझा गए। मंगलवार को दिनभर बादल छाए रहे और बूंदाबांदी भी हुई। वर्तमान में किसान धान की मोटी फसल की कटाई में जुटे हैं। इसी महीने पाकिस्तानी गोलाबारी से पलायन को मजबूर हुए सीमावर्ती ग्रामीण करीब बाइस दिन बाद घरों को लौटे थे। इस दौरान वह फसल की देखभाल नहीं कर सके थे। अब फसल पक गई है और इसकी कटाई जारी है। अगर अधिक बारिश हो गई तो यह बर्बाद हो जाएगी। पहले से ही धान की यह फसल कई मुसीबतें झेल चुकी है। किसान सागर सिंह, मुलखराज, धनीराम, सोमराज आदि का कहना है कि तमाम बाधाओं को पार करते हुए धान की शरबती, जय चैना और रतना आदि प्रजातियों की मोटी फसल पककर तैयार हो गई है। इसकी कटाई जारी है। बाढ़ और बारिश में उत्पादन में बड़ी कमी आएगी। इसके बावजूद उन्हें फसल से उम्मीदें हैं कि साल भर खाने लायक धान तो मिल ही जाएगी। उन्होंने कहा कि तीन दिन पहले ही वह शिविरों से लौटकर आए हैं। अब एक बार फिर मौसम का मिजाज बिगड़ता नजर आ रहा है। फसल को समेटने के लिए कम से कम दस दिन चाहिए। अगर अधिक बारिश हो गई तो यह बर्बाद हो जाएगी।