हत्या के बाद कश्मीरी पंडित पूरण भट्ट के के परिजनों ने जम्मू जाते वक्त घर की चाबी मुस्लिम महिला फिरदौस को सौंप दी, ताकि वह घर की देखभाल करती रहें। फिरदौस ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और पूरण के घर पर काम करती है। वह उसे बहन मानते थे। हर वक्त बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की बात करते थे।
आतंकियों की गोली का शिकार बने पूरण के परिवार के साथ पड़ोसी मुस्लिमों से काफी बनती थी। वह उन पर पूरा भरोसा करते थे। यही वजह है कि हत्या के बाद जम्मू जाते वक्त उन्होंने घर की चाबी एक मुस्लिम महिला फिरदौस को सौंप दी, ताकि वह घर की देखभाल करती रहें। फिरदौस ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और पूरण के घर पर काम करती है।
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वह उसे बहन मानते थे। हर वक्त बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की बात करते थे। मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने कहा कि आतंकवाद के दौर में भी उन्होंने कभी घाटी नहीं छोड़ी, क्योंकि उन्हें स्थानीय लोगों का प्यार व समर्थन मिलता था। एक बुजुर्ग पंडित ने कहा कि हम मुस्लिमों के साथ भाईचारे के साथ रहते हैं। इसका उदाहरण पूरण का परिवार है, जिन्होंने अपने घर की चाबी पंडित समुदाय के लोगों को सौंपने के बजाय एक मुस्लिम महिला को सौंपी।
मुट्ठी में पूरण के घर पर पसरा मातम
शोपियां जिला के चौधरी गुंड इलाके में आतंकियों की गोली का निशाना बने कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट बड़े भाई अश्वनी कुमार भट्ट के साथ कश्मीर में थे। उनका एक घर जम्मू में मुठ्ठी के विनायक नगर में है, जहां पत्नी स्वीटी, बेटा शानू और बेटी श्रेया के साथ रहते थे। उनकी हत्या के बाद शनिवार को मुट्ठी स्थित घर पर मातम का माहौल रहा।
शोपियां के चौधरी गुंड में पूरण कृष्ण भट का बाग है, जिसकी देखरेख के लिए 15 दिन पहले जम्मू से गए थे। उनकी हत्या की खबर के बाद जम्मू स्थित घर पर रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोग पहुंच गए। वहीं, संभागीय आयुक्त जम्मू रमेश कुमार, एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह, डीआईजी विवेक गुप्ता, जिला उपायुक्त अवनी लवासा, एसएसपी चंदन कोहली, एडीसी सतीश शर्मा और तहसीलदार जम्मू नॉर्थ जय सिंह भी परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे।
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पूरण कृष्ण भट ने 1989 में बिगड़े हालात के बावजूद घाटी नहीं छोड़ी थी। बाद में आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में खराब हुए हालात को देखकर पूरण कृष्ण भट्ट परिवार सहित मुट्ठी स्थित घर पर आ गए थे।
तब से उनके बच्चे जम्मू में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। पूरण कृष्ण भट के शव का अंतिम संस्कार रविवार सुबह दस बजे किया जाएगा। संभागीय आयुक्त जम्मू रमेश कुमार ने कहा कि यह दुख की घड़ी है और सरकार परिवार के साथ है।