जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पहली बार फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत फार्मासिस्टों के लिए पंजीकरण और सत्यापन की आनलाइन सुविधा शुरू की गई है। अब फार्मासिस्टों को इसके लिए दफ्तरों के चक्कर काटने नहीं पड़ेंगे। उन्हें ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड करने होंगे। जांच के बाद उन्हें पंजीकरण और सत्यापन प्रमाणपत्र जारी कर दिए जाएंगे। बुधवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वित्तीय आयुक्त अटल डुल्लू ने ऑनलाइन के लिए औपचारिक तौर पर पोर्टल लांच किया। इसमें दस्तावेजों को अपलोड करने वाले उम्मीदवारों को फार्मासिस्ट के रूप में प्रमाणपत्र सौंपे गए। यह नई व्यवस्था कोविड संकट के बीच राहत देगी।
वित्तीय आयुक्त ने जम्मू-कश्मीर में फार्मेसी परिषद के कामकाज की सराहना करते कहा कि सभी हितधारक इस पहल का पूरा लाभ उठाएंगे। फार्मासिस्ट स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फार्मेसी परिषद सुनिश्चित करे कि जम्मू-कश्मीर में फार्मेसी का अभ्यास और पेशा एक कुशल तरीके से विनियमित करें और यह निकाय फार्मेसी पेशेवरों द्वारा नैतिक, संहिता और आचरण की पवित्रता को बनाए रखने का काम करें। उम्मीदवारों को पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध व्यवस्था फार्मासिस्ट पंजीकरण प्रमाणपत्र, नवीनीकरण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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फार्मासिस्टों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाने के निर्देश
वेब पोर्टल को लाभार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार अपगेट किया गया है। डुल्लू ने उन सभी पंजीकृत फार्मासिस्टों पर विचार करने की आजीवन छूट पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार की सराहना की, जो 2011 (1955 एडी) निरस्त किए गए राज्य कानून, अर्थात जेेएंडके फार्मेसी अधिनियम 2011 के तहत पंजीकृत थे। उन्होंने फार्मेसी परिषद की अध्यक्ष लोतिका खजूरिया को फार्मासिस्टों की तकनीकी विशेषज्ञता को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फार्मेसी विनियम के प्रशासन के कारण होने वाली किसी भी शिकायत के निवारण के लिए एक टोल फ्री नंबर प्रदान करने का निर्देश दिया।