सुचेतगढ़ (जम्मू)। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वाले ग्रामीणों ने जम्मू-कश्मीर में लगातार अशांति और आतंकवाद को फैलाने में जुटे पाकिस्तान को बुलेट का जवाब बैलेट से दिया है। डीडीसी चुनाव के सातवें चरण में बॉर्डर से लगे सुचेतगढ़ और आरएस पुरा सीट पर वोटों की बरसात हुई। इन दोनों सीटों पर क्रमश: 71.21 एवं 65.85 फीसदी वोट पडे़। मतदान के लिए सुबह से ही लंबी लाइनें लगीं रहीं। लोगों का सहारा लेकर बुजुर्ग भी मतदान केंद्रों तक पहुंचे। इन सबसे अलग पोलिंग बूथों पर शान से लहराता तिरंगा मतदान करने आए लोगों का जोश दोगुना कर रहा था। दोनों सीटों के लगभग आधा दर्जन मतदान केंद्रों पर निर्धारित समय के बाद भी मतदान चलता रहा क्योंकि मतदाताओं की लाइन पहले से लगी हुई थी।
सुचेतगढ़ सीट के 102 में से कई गांव जीरो लाइन के करीब हैं। यहां के लोग आए दिन पाकिस्तानी गोलाबारी का सामना करते हैं। इनमें सुचेतगढ़, अब्दुल्लियां, हंसुचक, बस्ती गुलाबगढ़, अबदाल, सईं, निकोवाल और जोड़ा फार्म शामिल हैं। नापाक पड़ोसी देश की गोलाबारी के खतरे से बेखौफ इन इलाकों के लोगों में लोकतंत्र के पर्व को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। कड़ाके की ठंड और कोहरे की चादर के बीच यहां सुबह ही लोगों की लंबी लाइनें लग गईं। मतदान में महिलाओं ने भी बढ़चढ़ कर भाग लिया। गुलाबगढ़ समेत कई गांवों में महिलाओं की लंबी कतारें दिखीं। यहां मतदान करने पहुंचीं महिलाओं का कहना था कि गांव के विकास और अपनी सरकार बनाने का उन्हें भी हक है। इस नाते वे अपने मत को खराब नहीं करना चाहती हैं। चूल्हा चौका तो रोज का काम है। इसके चक्कर में सरकार बनाने का मौका नहीं खोना है, लेकिन वोट डालने के बाद उस काम को भी बखूबी पूरा करेंगी। युवाओं में भी उत्साह देखते ही बन रहा था।
आरएस पुरा में भी दिखा लोकतंत्र का रंग
आरएस पुरा सीट के अंतर्गत 104 गांव आते हैं। इनमें बड़ियाल ब्राह्मणा, देरियां, गेगियां, आगरा चक, खाना चक, सतराइयां आदि गांवों में भी बंपर वोटिंग हुई। सतराइयां में मतदाताओं की लंबी कतारें लगीं थीं। इसी तरह जीरो लाइन से सटे बड़ियाल ब्राह्मणा व देरियां गांव में भी ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बना। हालांकि, आरएस पुरा के कई गांव सीमा से कुछ दूरी पर हैं, लेकिन यहां भी लोकतंत्र का रंग दिखा।
अब्दुल्लियां में बिक रहा भीमा का मिल्क केक
जीरो लाइन पर अब्दुल्लियां गांव पाकिस्तानी गोलाबारी का अक्सर शिकार होता रहा है। इस गांव में भी लोकतंत्र के पर्व का जश्न दिखा। इन सबसे अलग यहां का प्रसिद्ध भीमा के मिल्क केक का कारोबार चलता रहा। पूछने पर संचालक भीमा चौधरी ने बताया कि वोट के उत्साह के साथ अपना भी कारोबार चलता रहे। भीमा ने कहा कि विकास के लिए डीडीसी सदस्य का होना जरूरी है। इस वजह से घर-परिवार के साथ ही सभी को वोट देने के लिए जागरूक भी किया है।
विकास और काम में सहूलियत के लिए डाला वोट
सुचेतगढ़ के अमरेंद्र कुमार व पियां टिब्बा के पवन कुमार ने कहा कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में कोई सरकार नहीं है। ग्रामीण इलाके के लोगों को अपने काम के लिए कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिला विकास परिषद का चुनाव हो जाने के बाद उनके काम आसानी से होंगे। क्षेत्र में विकास कार्य भी होंगे। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा। वोट इसी उम्मीद से डाला है।