अर्थशास्त्री और वित्त मंत्री हसीब द्राबू से जैसे बजट की उम्मीद थी, वैसा ही बजट रियासत के सामने आया है। यह पीपुल्स फ्रेंडली, उद्यमियों के लिए फायदेमंद और लोकप्रिय बजट है। इसमें संरचनात्मक परिवर्तन और नई दिशा की झलक नजर आ रही है। अर्थशास्त्री शकील कलंदर बता रहे हैं कैसा है द्राबू का बजट।
ऐसे बजट कम ही देखने को मिलते हैं। सरकार के पास पैसा उतना ही है। 25 फीसदी राजस्व से अर्जित होगा और शेष 75 फीसदी केंद्रीय मदद व कर्ज से, लेकिन परंपरागत तरीके से इसमें ‘प्लान एंड नान प्लान’ न दिखाकर इसे संघीय राजकोषीय प्रणाली (फेडेरल फिजिकल सिस्टम) के रूप में दिखाया गया है, जो बड़ा परिवर्तन है। वर्तमान परिस्थितियों में इससे अच्छा बजट नहीं हो सकता था।
खास बात यह है कि वित्त मंत्री ने महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने का प्रयास किया है। 14 साल की बच्चियों के लिए साढ़े सात लाख का फंड एक सराहनीय प्रयास है। इससे रियासत में ‘बेटी बचाओ’ के प्रयासों को बल मिलेगा। हालांकि सरकार इस योजना को पहले उन क्षेत्रों में लागू करने जा रही है, जहां पुरुष और महिला के बीच अंतर बढ़ रहा है, लेकिन सरकार को सभी क्षेत्रों में इसे लागू करना चाहिए।
वित्त मंत्री ने राजस्व नुकसान को बीमा के माध्यम से पूरा करने का प्रयास किया है, जो स्वागत योग्य कदम है। जम्मू-कश्मीर में अकसर बंद और कर्फ्यू के कारण उद्यमियों और व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस कदम से भरपाई करने में मदद मिलेगी।
इससे निवेशक का पैसा महफूज रहेगा। इसके अलावा बिजली में डिमांड चार्ज और वाटर चार्ज हटाने का फायदा लोगों को मिलेगा। रियासत में आई बाढ़ के बाद यह जरूरी था। वित्त मंत्री ने हालांकि बजट में बाढ़ प्रभावितों के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा, लेकिन उम्मीद है कि केंद्रीय पैकेज से इसे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
रियासत के ताजा हालात से एकाएक उबारने के लिए वित्त मंत्री के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। थोड़ा समय लगेगा। यूं कहा जाए कि बजट में कुछ खामियां हैं, लेकिन अच्छाइयां ज्यादा हैं।