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मुफ्ती की मंशा और नीयत पर कोई संदेह नहीं: निर्मल सिंह

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जम्मू-कश्मीर में साझा सरकार के गठन के बाद से ही सवालों में घिरा भाजपा-पीडीपी गठबंधन कितना मजबूत है, और दोनों दलों के नेताओं के बीच की समझ कितनी गहरी है। सरकार किस दिशा में आगे बढ़ रही है। इन तमाम मुद्दों को लेकर उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने अमर उजाला से खास बातचीत की। पेश है बातचीत के प्रमुख अंश:
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सवाल: सरकार के दो माह के कार्यकाल में ही मुख्यमंत्री के बयानों और मसर्रत आलम की रिहाई सरीखे मसलों ने क्या गठबंधन की बुनियाद हिला दी?
जवाब: हमारा गठबंधन वैचारिक या राजनीतिक नहीं है। जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए दो अलग धुरी वाले दलों के बीच गठबंधन हुआ है। दोनों ही दलों के नेताओं ने लंबा मंथन करने के बाद निर्णय लिया था। कुछ समय दीजिए, आपको गठबंधन के असर का लाभ दिखने लगेगा।

सवाल: सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है और इससे वह कैसे निपटेगी?
जवाब: जम्मू-कश्मीर में सरकार की लड़ाई अलगाववाद से है। इसके लिए सबसे बड़ा औजार सूबे का विकास है। एक तरह से हम तलवार की धार पर चल रहे हैं। विकास का भेदभाव समाप्त कर हम सूबे में नए युग की शुरुआत करेंगे। हमारी सरकार सांप्रदायिक या धर्मनिरपेक्ष की सियासत के बजाय अंतिम व्यक्ति के विकास की कल्पना के साथ काम करेगी।
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अलगाववाद पर क्या बोले उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह

सवाल: राज्य में अलगाववाद की फिर से जोर पकड़ रही सियासत से कैसे निपटेंगे?  
जवाब: जमीनी हकीकत अलग है। प्रदेश में अलगाववाद की जड़ें कमजोर हो गई हैं। अलगाववादी मानसिकता वाले लोग बहुत थोड़े और सीमित इलाकों में ही रह गए हैं। सूबे की जनता राष्ट्रीय विचारधारा से जुड़ रही है। लोगों को यह महसूस हो गया है कि अलगाववाद की सियासत के कारण बीते 60 सालों से प्रदेश को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। विकास ठप्प पड़ा है, आर्थिक स्थिति चरमरा गई है, रोजगार के अवसर क्षीण हैं। यदि हालात ठीक रहेंगे तो पर्यटक आएंगे। इससे प्रदेश का ही भला होगा। हम प्रदेश का वातावरण दुरुस्त करेंगे।
 
सवाल: अलगाववाद का मुकाबला कैसे करेंगे। वह भी ऐसे में जब मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद पर भी आरोप लगते हैं?
जवाब: अलगाववाद का मुकाबला हम प्रदेश में विकास की आंधी बहाकर करेंगे। मुख्यमंत्री मुफ्ती सईद की मंशा पर कोई संशय या शक की गुंजाइश नहीं है। वे एक परिपक्व नेता हैं। दो धुरी वाले दल होने के बावजूद पीडीपी-भाजपा का गठबंधन एक ध्येय के लिए हुआ है। वह ध्येय है जम्मू-कश्मीर का विकास।

सवाल: मसर्रत की रिहाई पर दोनों दलों के रिश्ते बेहद तल्ख हो गए थे। मुफ्ती पर सियासी लाभ के लिए मसर्रत की रिहाई का आरोप लगा?
जवाब: मसर्रत के मामले पर हमें बेवजह घेरा जा रहा है। रिहाई का फैसला मुफ्ती का नहीं था। उसकी रिहाई का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का था। इस पर अमल तो पूर्व की नेकां सरकार ने कर दिया था। हां, हम इसलिए घिरे क्योंकि रिहाई हमारी सरकार बनने के बाद हुई। हम मुद्दों और उद्देश्यों की राजनीति करते हैं। मसर्रत ने थोडी आंख दिखाई तो हमने उसे जेल में डाल दिया है।
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अनुच्छेद 370 पर क्या सोचती है भाजपा

सवाल: आप पर आरोप लग रहे हैं कि सत्ता के लिए आपने अनुच्छेद 370 सहित विचार धारा के मुद्दों से समझौता कर लिया है?
जवाब: हम श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित तमाम कार्यकर्ताओं और पवित्र आत्माओं की कुर्बानी को व्यर्थ नहीं होने देंगे। हमने विचारधारा या अनुच्छेद 370 से कोई समझौता नहीं किया है। भाजपा के लिए यह मुद्दा आज भी है। हम अपने विचारों पर कायम हैं। दोनों दल अपने-अपने मुद्दे पर कायम हैं। लेकिन सरकार का गठन जनादेश का आदर करते हुए गर्वनेंस के मुद्दे पर हुआ है। सरकार का मकसद सूबे में गर्वनेंस स्थापित करना है। रही बात अनुच्छेद 370 की तो प्रधानमंत्री पहले ही यह ऐलान कर चुके हैं कि इस पर बहस होनी चाहिए ।

सवाल: विकास की बात करें तो प्रदेश का सारा ध्यान महज श्रीनगर के इलाकों तक सीमित रहता है। जम्मू एवं लद्दाख क्षेत्र को हमेशा से उपेक्षा ही झेलनी पड़ी है?

जवाब: हमारी सरकार में ऐसा नहीं होगा। हम पूरे प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुख्यमंत्री खुद जम्मू एवं लद्दाख क्षेत्र के विकास के लिए उत्साहित हैं। और योजनाओं को अंजाम दे रहे हैं। जम्मू को पर्यटन हब और उधमपुर को योग केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इनका ऐलान खुद मुख्यमंत्री करेंगे।
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