पूर्व आतंकियों को हज पर जाने के लिए पासपोर्ट पूरी जांच के बाद ही दिया जाता है। उनकी गतिविधियों की जांच के बाद पासपोर्ट की अनुमति दी जाती है। यह जानकारी मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को विधानसभा में दी।
नेकां विधायक शमीम फिरदौस के सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यदि कोई आवेदक जो हथियारों की ट्रेनिंग के लिए पीओके या पाकिस्तान गया था और लौट आया है और लौटने के बाद से वह किसी देश विरोधी गतिविधि में शामिल नहीं हुआ है, उसके आवेदन पर विचार किया जा सकता है।
इसके लिए उसे लौटने के बाद से 15 साल की अवधि को पूरा करना होगा। स्थानीय आतंकी जिसने समर्पण कर दिया हो या फिर गिरफ्तार किया गया हो या फिर कोर्ट से छूट गया होगा, के आवेदन पर उसकी गतिविधियों की जांच के बाद ही क्लीयरेेंस दिया जाता है।
पूर्व आतंकियों के पुनर्वास के लिए नीति भी बनाई गई है। इसके तहत 1.50 लाख रुपये, जमा हथियार के लिए रकम तथा तीन साल के लिए दो हजार रुपये प्रति महीने के हिसाब से स्टाइपेंड दिया जाता है।