पूर्व उप मुख्यमंत्री के एडिशनल पीआरओ की सुरक्षा हटाने के मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पीआरओ केवल कृष्ण शर्मा हाईकोर्ट के जस्टिस ताशी राबस्तन के समक्ष पेश हुए। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ने याचिकाकर्ता प्रो. एसके भल्ला और प्रतिवादी केवल कृष्ण शर्मा व्यक्तिगत रूप से पेश हुए।
अदालत ने उन्हें ताजा आवेदन फाइल करने की अनुमति प्रदान करते हुए एक अक्तूबर 2014 के संवाद को रिकार्ड में लिया। साथ ही तीन अगस्त 2014 से शुरू होने वाले सप्ताह में इस नई याचिका को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए केवल कृष्ण ने उस समय सनसनी फैला दी, जब उन्होंने पूर्व उप मुख्यमंत्री ताराचंद और दो सीनियर पुलिस कर्मियों से अपनी जान को खतरा बताया।
उप मुख्यमंत्री पर लगाए गए हत्या, बलात्कार और भ्रष्टाचार के आरोप
उन्होंने अदालत ने कहा कि उनकी जान को खतरा है और कोर्ट से आग्रह किया कि उनकी सुरक्षा फिर से बहाल करवाई जाए। ताकि वह अपने घर सुरक्षित पहुंच सकें, क्योंकि उन्हें डर है कि पूर्व उप मुख्यमंत्री के लोग रास्ते में खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि उसकी सुरक्षा हटाने के लिए अदालत ने कोई निर्देश नहीं दिए हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन ने स्वयं उसकी सुरक्षा हटा ली है।
केवल कृष्ण ने कहा कि पूर्व उप मुख्यमंत्री पर लगाए गए हत्या, बलात्कार और भ्रष्टाचार के आरोपों पर आज भी कायम हैं। साथ ही उनके द्वारा दायर उस जवाब से इंकार किया, जिसमें कहा गया था कि उनको पूर्व उप मुख्यमंत्री की ओर से जान को खतरा नहीं, बल्कि आतंकवादियों और अपराधियों से उसे डर है। यह जवाब पूर्व उप मुख्यमंत्री और पुलिस के दबाव में बनाया गया था।
केवल शर्मा की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस ताशी राबस्तन ने कहा कि अगली सुनवाई से पहले लिखित रूप से आरोपों को अदालत में रखें। कार्यवाही की समाप्ति से पहले केवल कृष्ण ने एक बार फिर सुरक्षा प्रदान करने का अदालत से आग्रह किया, लेकिन कोर्ट ने पहले लिखित रूप में आवेदन करने को कहा।