पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कश्मीर में अमन का फार्मूला सुझाया है। बकौल फारूक उन्होंने मोदी को हालात में सुधार लाने के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है। कहा अब मोदी पर निर्भर है कि वे इसे किस रूप में लागू करते हैं।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में फारूक ने कहा कि पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार ने स्कूलों को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। मिडिल से लेकर हायर सेकेंडरी तक के 28 स्कूल आग की भेंट चढ़ा दिए गए। शिक्षा क्षेत्र में आग की लपटों ने बर्बादी बढ़ा दी, तब सरकार महज चिंता जताने लगी।
रियासत सरकार परीक्षाएं लेने पर अड़ी है। अशांति के कारण जब चार महीने से स्कूल-कालेज बंद हैं तो कैसी परीक्षा? फारूक ने कहा कि जब गुलाम मोहम्मद शाह सीएम थे तब भी परीक्षाएं स्थगित हुईं थीं। फारूक ने बातचीत के दौरान जम्मू-कश्मीर सरकार को नसीहत भी दी।
'पाकिस्तान से लड़ाई का कोई फायदा नहीं होने वाला'
Farooq Abdullah
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बातचीत में फारूक ने कहा मौजूदा सरकार इसे इगो का मुद्दा न बनाए। परीक्षाएं मार्च में होनी चाहिए। सरकार ग्रेस देने और कोर्स को 50 प्रतिशत घटाने की बात कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या आल इंडिया एग्जाम में कश्मीर छात्रों को ग्रेस मिल पाएगा।
इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीर में अलगाववादियों समेत सभी पक्षों से तुरंत आधिकारिक बातचीत की जानी चाहिए। पाकिस्तान से लड़ाई का कोई फायदा नहीं होने वाला है। चार दफा लड़ाई लड़ ली, लेकिन, लाइन वहीं खड़ी है। तनातनी छोड़ें और वार्ता की मेज पर समाधान खोजें।
'गोलाबारी बंद हो, बार्डर के लोगों से वादा निभाएं'
फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला
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फारूक ने कहा कि पाक से तनाव पर हर बार सरहद के लोगों को अंजाम भुगतना पड़ता है। सीमा के दोनों पार आबादी मुश्किल में है। दोनों तरफ से गोलाबारी तुरंत बंद होनी चाहिए। मैंने मुख्यमंत्री रहते हुए और बाद में उमर सरकार ने जीरो लाइन पर बसे लोगों को वहां से बाहर निकालकर पुंछ में बसाने की योजना बनाई थी।
फारूक ने कहा कि मैनें इसके लिए जमीन भी देखी थी। लेकिन बाद की सरकारों ने कुछ ने नहीं किया। पुंछ में पाकिस्तान की चौकियां ऊंचाई पर हैं। इसलिए हमें ज्यादा नुकसान होता है।
'देश के लिए कुर्बानी देने वालों को इज्जत बख्शे केंद्र'
रियासत के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला
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फारूक ने कहा कि देश पर कुर्बानी देने वालों की इज्जत करना जरूरी है। केंद्र ने संसद में वन रैंक वन पेंशन का एलान किया, तो फिर ठीक तरीके से लागू क्यों नहीं कर रहे।
पूर्व सैनिकों को आत्महत्या करनी पड़ रही है। सर्जिकल स्ट्राइक को वोट के लिए भुनाने की कोशिश हुई। केंद्र को समझना पड़ेगा कि जवान किसी पार्टी का नहीं बल्कि मुल्क का है।