जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर में हर तीन घंटे में एक महिला उत्पीड़न का शिकार हो रही है। दहेज और यौन शोषण के लिए महिलाओं को आग तक लगाई जा रही है। इसमें पुलिस की कार्यवाही भी गौण है।
खुद को बेसहारा होने के डर से महिलाएं अपनी आवाज नहीं उठातीं। इसका खुलासा श्रीनगर के एसएमजीएस जच्चा-बच्चा अस्पताल में झुलसने से घायल होकर भर्ती हुई महिलाओं के खुलासे से हुआ है।
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नईमा मेहजूर ने बताया कि वह हैरान हैं कि कश्मीर में इतनी तेजी से महिला उत्पीड़न का ग्राफ बढ़ रहा है। महिला आयोग की टीम ने अस्पताल का दौरा किया। यहां आग से झुलस कर भर्ती हुई महिलाओं से बात की गई।
99 फीसदी महिलाएं दहेज और यौन शोषण की शिकार थीं। कई महिलाओं का कहना था कि उनको ससुरालियों ने आग लगा दी। सबसे अहम बात तो यह है कि इसका कोई मामला दर्ज नहीं।
इसके बारे में पीड़ित महिलाओं ने बताया गया कि अगर वह आवाज उठाएंगी तो उनको घर से निकाल दिया जाएगा। इन महिलाओं में सरकारी विभागों में कार्यरत महिलाएं और बड़े घरों की महिलाएं भी हैं।