सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए सेना में भर्ती का एक और अवसर खुल गया है। सेना ने सीमांत इलाकों के लिए ‘जागरूक हिंदुस्तानी’ और ‘बुलंद हौसले’ जैसी अनोखी योजनाएं शुरू की हैं। इसके तहत युवाओं को सेना से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
वेस्टर्न कमांड के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह के अनुसार ‘जागरूक हिंदुस्तानी’ और ‘बुलंद हौसले’ जैसी योजनाओं से सेना और आम नागरिकों के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं। पिछले दिनों कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे नागरिकों की मदद से सेना ने कई बड़ी वारदातों को नाकाम किया है।
इसी क्रम में सेना ने सीमांत इलाकों के होनहार युवाओं का चयन कर उन्हें उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है ताकि उनका कैरियर बन सके। इसी के तहत पहले चरण में 30 युवाओं का चयन कर उन्हें सेना में शामिल होने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और भविष्य में उन्हें सेना में शामिल किया जाएगा।
इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सेना के साथ जोड़ने के अलावा राष्ट्र के प्रति उन्हें उनकी जिम्मेदारी से अवगत करवाना है। सीमांत इलाकों में ऐसे कई युवा है, जो सेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह से ‘जागरूक हिंदुस्तानी प्रीमियर क्रिकेट लीग’ के आयोजन का उद्देश्य भी युवाओं को जोड़ना है।
इससे सीमांत इलाकों के लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है। साथ ही युवाओं को उनके क्षेत्र में सक्रिय किया जा रहा है ताकि वह किसी संदिग्ध को देख सूचित करें।
इसके अलावा बुलंद हौसलों के तहत कुछ अनोखा करने वालों को सेना की ओर से सम्मानित करने के अलावा पात्र होने पर नौकरी भी देने की व्यवस्था की गई है। इसी क्रम में अरनिया के आंचल सिंह को नौकरी देने की प्रक्रिया चल रही है।