यासिर ने सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स के पेट्रोल वाहन को अरिहाल-पुलवामा रोड पर आईईडी विस्फोट कर जून 2019 में उड़ा दिया था। इसमें दो जवान शहीद हो गए थे, जबकि 17 घायल हुए थे। उस समय 44 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल एके सिंह ने चेतावनी दी थी कि घटना में शामिल आतंकी जहां कहीं भी छिपे होंगे उन्हें ढूंढकर मार गिराया जाएगा।
पिता की समर्पण की गुहार भी काम न आई
यासिर के गांव कस्बायार में चल रही मुठभेड़ की निगरानी भी कर्नल एके सिंह ही कर रहे थे। उन्होंने यासिर के पिता को मौके पर बुलाकर समर्पण के लिए कहा, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। यासिर का साथी पाकिस्तानी आतंकी फुरकान लगातार भारी फायरिंग करता रहा। यासिर दक्षिण कश्मीर में सक्रिय जैश के विभिन्न ग्रुपों को गाइड करता था। इसके चलते संगठन में 2018 में शामिल होने के बाद वह लगातार अपना कद बढ़ाता गया।
दोनों कई वारदातों में रहे थे शामिल, मारा जाना बड़ी सफलता: आईजी
आईजी के अनुसार दोनों आतंकी कई आतंकी वारदात में शामिल रहे थे। इनका मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता है। ऑपरेशन को पेशेवर तरीके से अंजाम देने के लिए जवान और अधिकारी बधाई के पात्र हैं।