केंद्र शासित प्रदेश बने जम्मू-कश्मीर में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलने से हिंदी का प्रचार प्रसार बढ़ना तय है। कर्मचारियों के अनुसार हिंदी को बढ़ावा मिलने से कामकाज में पारदर्शिता आएगी। आम लोगों के बीच हिंदी भाषा सामान्य है। जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से जम्मू प्रांत में एक बड़ी आबादी की अन्य भाषाओं पर पकड़ नहीं है। ऐसे में राजकीय कामकाज में हिंदी के प्रयोग से लोगों को आसानी होगी।
जम्मू-कश्मीर मेडिकल एंप्लॉइज फेडरेशन के प्रधान सुशील सूदन का कहना है कि विभागीय कामकाज में हिंदी को बढ़ावा देकर सरल बनाया जाना चाहिए। इससे आम लोगों तक विभागों की पहुंच बढ़ेगी। पहले अंग्रेजी व उर्दू को तरजीह मिलती रही है, जबकि हिंदी में कामकाज होने से लोगाें को आसानी होगी। ज्यादातर लोगों को आवेदन अथवा दस्तावेज में लिखे शब्दों की पूरी जानकारी नहीं होती थी। पॉवर एंप्लॉइज कोऑर्डिनेशन कमेटी के संयोजक सचिन दीपू का कहना है कि हिंदी के आधिकारिक भाषा हो जाने से इसके इस्तेमाल से विभागीय कामकाज में हिंदी को बढ़ावा मिलेगा।
पहले राजस्व पेपर सहित अन्य दूसरे दस्तावेजों दूसरी भाषा में रहते थे। लेकिन खासतौर पर जम्मू प्रांत के लोग ऐसी भाषा से अंजान थे। नॉर्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन के सचिव शंबेर सिंह ने हिंदी के आधिकारिक भाषा घोषित होने पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि अब सभी विभागों में हिंदी में कामकाज होगा।
जम्मू विश्वविद्यालय की हिंदी विशेषज्ञ परविंदर कौर ने कहा कि हिंदी का उपयोग करने वालों के लिए यह खुशी की बात है। इससे हिंदी बोलने, लिखने वालों की संख्या बढ़ेगी। लोगों को आगे आकर हिंदी को अपनाना चाहिए। हिंदी भाषा में कई विशेषताएं हैं। यह आम लोगों तक पहुंच रखती है।