अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी बनाने, करीब छह वर्ष से रोका गया वेतन जारी करने व अन्य लंबित मांगों का पूरा करने जलशक्ति विभाग के कर्मचारियों ने शनिवार को कार्यालय के बाहर धरना देकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने बताया कि सरकार की तरफ से उनकी मांगों को लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है। उनकी मांग है कि दो मार्च को पेश किए जाने वाले बजट में उनको स्थायी कर्मचारी बनाने और रोका गया वेतन जारी करने का आदेश जारी किया जाए।
जलशक्ति इंप्लाइज एंड वर्कर्स एसोसिएशन के प्रधान सोमनाथ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने दोपहर करीब एक बजे कार्यालय के बाहर धरना देकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सोमनाथ ने बताया कि सरकार के सभी प्रतिनिधियों ने उनको झूठे आश्वासन दिए हैं। जहां तक कि उपराज्यपाल ने भी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया है।
जब जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था तो सबने उम्मीद लगाई थी कि अब जम्मू-कश्मीर में मिनिमम वेज एक्ट लागू होगा और हजारों अस्थायी कर्मचारियों को इनका लाभ मिलेगा। लेकिन आज तक इसको लागू नहीं किया गया है।
इतना ही केंद्र के गृहमंत्री एलान करते हैं कि प्रदेश में मिनिमम वेज एक्ट लागू कर दिया गया है, जबकि हकीकत यह है कि जमीनी स्तर पर इसको आज तक लागू नहीं कियाग या है। सरकार की तरफ से अस्थायी कर्मचारियों को करीब छह वर्ष का वेतन नहीं जारी किया गया है।
वेतन न मिलने के कारण सभी आर्थिक परेशानियों से जूझने को मजबूर हो चुके हैं। सभी कर्ज लेकर गुजारा कर रहे हैं। जब भी वेतन की मांग की जाती है तो कुछ महीने का वेतन जारी कर जल्द बाकी वेतन देने का आश्वासन दे दिया जाता है।
इसके साथ सरकार ने आज तक उनको स्थायी कर्मचारी बनाने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की है। जबकि इस मांग को लेकर कई बार हड़ताल भी की जा चुकी है। 11 नवंबर 2021 को तो उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया था कि चंद महीनों में सभी मांगों का पूरा कर दिया जाएगा, लेकिन आज तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई है।
उनकी मांग है कि दो मार्च को पेश किए जाने वाले प्रदेश के बजट में जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारी, मिनिमम वेज एक्ट लागू करने का आदेश जारी करने के साथ रोका गया वेतन जारी करने का लेकर राशि जारी की जाए। इस मौके पर विजय शर्मा, दिनेश केसर, सूरज प्रकाश, मक्खन चंद, जगदीश मगोत्रा व अन्य मौजूद थे।