केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख रक्षा बुनियादी ढांचे और स्थानीय विकास के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर छूने वाला है। प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत सितंबर 2025 में शुरू हुई तीन बड़ी रणनीतिक बिजली ट्रांसमिशन परियोजनाएं सितंबर 2026 के अंत में पूरी हो जाएंगी। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरे होते ही पड़ोसी देश चीन से सटे सियाचिन बेस कैंप के साथ ही नुब्रा और जंस्कार जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे और दुर्गम सीमावर्ती इलाके पहली बार नेशनल पावर ग्रिड से जुड़ जाएंगे।
रूट और क्षमता
सियाचिन बेस कैंप से सटी है चीन और पाकिस्तान की सीमा
सियाचिन बेस कैंप से चीन की सीमा (अक्साई चीन क्षेत्र) की हवाई दूरी लगभग 40-45 किलोमीटर और पाकिस्तान की करीब 20-25 किलोमीटर है। यह पूरा क्षेत्र कराकोरम रेंज और साल्तोरो रिज के बीच सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील है। कड़ाके की ठंड में चौबीस घंटे सेना के जवान मुस्तैद रहते हैं। यहां बिजली का एकमात्र जरिया भारी भरकम डीजल जेनरेटर ही हैं जिससे काफी मात्रा में कार्बन उत्सर्जित होता है। अब सितंबर में यहां विद्युत आपूर्ति शुरू होने से जवानों के रहन-सहन के साथ ही निगरानी में काफी सहूलियत होगी। कार्बन उत्सर्जन भी लगभग समाप्त हो जाएगा।
‘भरोसेमंद और बिना रुकावट वाली बिजली सिर्फ बुनियादी ढांचा नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ है। नुब्रा और जंस्कार को ग्रिड से जोड़ना ऐतिहासिक है। इससे सेना की ताकत, स्थानीय स्तर पर होमस्टे, विंटर टूरिज्म और एंटरप्रेन्योरशिप को नई उड़ान मिलेगी।’