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कड़ाके की ठंड में बिजली की आंखमिचौली

Sat, 27 Dec 2014 10:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
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कड़ाके की ठंड में बिजली की बढ़ी मांग की वजह से अघोषित कटौती का सिलसिला जारी है। ठंड में पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन गिर रहा है। इस वजह से बिजली की अघोषित कटौती बढ़ रही है। दूरदराज और पहाड़ी इलाकों में कटौती ज्यादा है। मैदानी इलाकों में भी विभाग जरूरत के हिसाब से बिजली कट लगा रहा है।
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ठंड में हीटर, ब्लोअर आदि उपकरणों के इस्तेमाल से बिजली ढांचे पर ओवरलोड बढ़ने से अघोषित कटौती में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। जरूरी घंटों में कटौती होने से लोगों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रियासत में बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर 1000 मेगावाट से पार होने के चलते मांग और आपूर्ति के बीच काफी अंतर आ गया है। विद्युत विभाग ने इस अंतर को पाटने के लिए बिजली कटौती को बढ़ा दिया है।

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन लगातार गिर रहा है। इस वजह से बिजली की मांग और उपलब्धता में अंतर एक हजार मेगावाट से ज्यादा का हो चुका है। ढांचे पर ओवरलोड भी बढ़ चुका है। ऐसे में जरूरत के अनुसार बिजली विभाग को ढांचे को नुकसान से बचाने के लिए कटौती करनी पड़ रही है।
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बिजली विभाग की ईएमएंडआरई डिवीजन जम्मू के सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सुनील कुमार का कहना है कि ठंड में बढ़ोतरी की वजह से बिजली ढांचे पर ओवरलोड बढ़ा है। जरूरत के अनुसार बिजली कटौती भी करनी पड़ती है।

पानी की आपूर्ति पर भी असर
बिजली की अघोषित कटौती से पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ रहा है। पेयजल आपूर्ति का पूरा सिस्टम पंपिंग पर निर्भर होने की वजह से बिजली बंद होने पर पंपिंग नहीं हो पाती और इसकी वजह से पेयजल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ता है।
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